मथुरा/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित राधा रानी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अद्भुत इतिहास और अनोखी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर देवी राधा को समर्पित है और देश का एकमात्र प्रमुख मंदिर है जहां राधा रानी को मुख्य रूप से पूजा जाता है।
इस मंदिर से जुड़ी एक बेहद अनोखी परंपरा यह है कि मंदिर में पहले भोग के रूप में मोर को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि मोर राधा रानी को अत्यंत प्रिय हैं, और इसी कारण मंदिर में सबसे पहले मोर को ही भोग लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
बरसाना, भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय सखी राधा रानी का जन्म स्थान माना जाता है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जिसे लाड़ली जी की शृंगार गिरी कहा जाता है। मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में राजा वीर सिंह ने कराया था, लेकिन इसकी पौराणिक मान्यता इससे भी पुरानी है।
यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं बल्कि इतिहासकारों और वास्तु प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि यहां की स्थापत्य शैली में राजस्थानी और मुगल वास्तुकला का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
मोर को पहला भोग: क्यों है खास?
राधा रानी मंदिर की सबसे विशिष्ट परंपरा यह है कि मंदिर में बनने वाले भोग का पहला भाग मोरों को समर्पित किया जाता है। मान्यता के अनुसार, राधा रानी को मोर अत्यंत प्रिय थे और मोर उनके सखा समान माने जाते हैं। मंदिर परिसर में सैकड़ों मोर आज भी स्वतः विचरण करते हैं।
राधा अष्टमी पर लगता है विशाल मेला
राधा अष्टमी, राधा रानी का जन्मोत्सव, इस मंदिर का सबसे बड़ा पर्व होता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिन बरसाना पहुंचते हैं। यहां पर लठमार होली, झूला उत्सव, और फूलों की होली जैसे भव्य आयोजन भी होते हैं।



