न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारतीय रक्षा प्रणाली की मारक क्षमता अब महज़ चर्चा नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुकी है। हाल ही में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने एक बड़ा खुलासा किया है। उनके अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच लड़ाकू विमानों को निशाना बनाकर गिरा दिया था। इस मिशन में भारत के कई एडवांस्ड हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें S-400, ब्रह्मोस, आकाश, MR-SAM और D-4 जैसी मिसाइल प्रणालियाँ शामिल थीं।
S-400: आसमान में घातक प्रभुत्व
रूसी तकनीक पर आधारित लेकिन भारत के अनुसार मॉडिफाइड S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। यह सिस्टम 400 किमी की दूरी तक हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। वायुसेना प्रमुख के अनुसार, इसने पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर तक जाकर दुश्मन के ठिकानों को टारगेट किया और दुश्मन के पायलटों को प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं मिला।
ब्रह्मोस: पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर तैनात डर
भारत-रूस की संयुक्त परियोजना से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को ऑपरेशन के दौरान ‘स्टैंड-ऑफ मोड’ में तैयार रखा गया था। यह मिसाइल हवा, जमीन और समुद्र से लॉन्च की जा सकती है और 300 किमी से अधिक दूरी पर बेहद सटीक वार करने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी तैनाती ने पाकिस्तानी आर्मी के भीतर बेचैनी बढ़ा दी थी।
आकाश और MR-SAM: कम ऊंचाई पर उड़ते लक्ष्यों के लिए काल
DRDO प्रमुख के अनुसार, आकाश मिसाइल सिस्टम और MR-SAM (मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल) ने पाकिस्तान की कम ऊंचाई पर उड़ने वाली लड़ाकू फॉर्मेशन्स को टारगेट किया। इन मिसाइलों की रफ्तार और सटीकता के सामने पाकिस्तान की वायुसेना बेबस नजर आई।
D-4 इंटरसेप्टर: मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच की रीढ़
भारत की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली का हिस्सा D-4 इंटरसेप्टर मिसाइल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभावित मिसाइल और रॉकेट हमलों को रोकने के लिए एक्टिव रही। यह मिसाइल उच्च गति से आने वाले खतरों को इंटरसेप्ट कर निष्क्रिय करने में सक्षम है।
पाकिस्तान की रणनीतिक विफलता उजागर
S-400 की लंबी दूरी तक मार, ब्रह्मोस की सटीकता और भारत की एयर डिफेंस सिस्टम की परत-दर-परत सुरक्षा ने पाकिस्तान की वायुसेना को करारा झटका दिया। विशेषज्ञों की मानें तो यह मिशन भारत की रणनीतिक क्षमता का सशक्त संदेश था—अब भारत सिर्फ रक्षात्मक नहीं, आवश्यकता पड़ने पर आक्रामक कार्रवाई में भी पूरी तरह सक्षम है।



