लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:– उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल मर्जर नीति में संशोधन के बाद, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे “PDA पाठशाला आंदोलन की महाजीत” करार दिया है। सरकार के निर्णय को भाजपा की नैतिक हार बताते हुए अखिलेश ने कहा कि यह जनता और शिक्षा के अधिकार की जीत है।
क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया था कि कम नामांकन वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को आपस में मर्ज किया जाएगा। लेकिन इस फैसले का शिक्षक संगठनों और अभिभावकों की ओर से कड़ा विरोध हुआ। विरोध के बीच सरकार ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि:
- एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाले स्कूलों को मर्ज नहीं किया जाएगा।
- 50 से अधिक नामांकित छात्रों वाले स्कूलों का विलय नहीं होगा।
अखिलेश यादव का तीखा प्रहार
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:”स्कूल मर्जर का फैसला वापस लेना ‘PDA पाठशाला’ आंदोलन की महाजीत है। शिक्षा का अधिकार अखंड होता है और रहेगा। शिक्षा विरोधी भाजपा की यह नैतिक हार है।“
उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि भाजपा सरकार का यह फैसला राजनीतिक आधार पर लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- स्कूलों को वहीं बंद किया गया, जहां समाजवादी पार्टी को वोट मिलते हैं।
- यह फैसला गरीबों से शिक्षा का अधिकार छीनने जैसा है।
- लखनऊ के संस्कृति स्कूल जैसे प्रोजेक्ट को भाजपा सरकार ने बंद कर दिया।
क्या है PDA पाठशाला आंदोलन?
समाजवादी पार्टी ने स्कूलों के विलय के विरोध में “PDA पाठशाला आंदोलन” की शुरुआत की थी। सहारनपुर में प्रायोगिक तौर पर एक पाठशाला की शुरुआत भी कर दी गई थी, जहां स्थानीय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था को चालू किया गया।
भाजपा सरकार पर आर्थिक व सामाजिक आरोप
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर एक साथ हमला बोलते हुए कहा: देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। महंगाई, बेरोजगारी, और किसानों की बदहाली चरम पर है।भाजपा सरकार नौकरियों को आउटसोर्स कर रही है और आरक्षण को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार देश को भावना से चला रही है, न कि अर्थव्यवस्था से।”
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी सवाल
अमेरिका द्वारा भारत पर व्यापारिक टैरिफ लगाने के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “भाजपा सरकार पिछले 11 वर्षों से अमेरिका के साथ मित्रता बढ़ा रही थी, लेकिन आज हमें अपमानजनक शब्द और आर्थिक दबाव झेलने पड़ रहे हैं। ये कैसी दोस्ती है?”



