कोलकाता, पश्चिम बंगाल /सर्वोदय न्यूज़:- चर्चित मामले में गिरफ्तार शर्मिष्ठा पनोली को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और साफ शब्दों में कहा कि “देश के एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है, और यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में नहीं आता।”
शर्मिष्ठा के वकील एडवोकेट डी.पी. सिंह ने अदालत में उनका पक्ष मजबूती से रखा, लेकिन कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा —“इस ऊर्जा को बचाकर रखें, किसी और केस में काम आएगी।”
अदालत ने इस दौरान यह भी कहा,“हमें बोलने की आज़ादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जाए। भारत विविधताओं से भरा देश है, और यहां हर वर्ग की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।”
इस टिप्पणी से कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि डिजिटल या सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों के सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब क्या आगे?
कोर्ट ने राज्य सरकार को केस डायरी दाखिल करने के लिए समय दिया है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 जून 2025 को निर्धारित की गई है।इसका मतलब यह है कि शर्मिष्ठा पनोली को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
यह मामला अब न सिर्फ कानूनी रूप से बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। हाईकोर्ट की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग की धार्मिक, सामाजिक या भावनात्मक आस्था को आहत करना स्वीकार्य नहीं है।



