गर्मी में दुधारू पशुओं की बीमारियाँ और बचाव के उपाय: वेटेरिनरी सर्जन डॉ. हेमंत तिवारी की सलाह

लाइफस्टाइल/सर्वोदय:- गर्मी का मौसम न केवल इंसानों के लिए, बल्कि पशुओं के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर दुधारू पशुओं के लिए। अत्यधिक तापमान और उमस के कारण पशुओं की सेहत पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है। इस विषय पर वेटेरिनरी सर्जन डॉ. हेमंत तिवारी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसे हर पशुपालक को जानना जरूरी है।

गर्मियों में क्यों होती हैं पशुओं को ज्यादा बीमारियाँ?

डॉ. तिवारी बताते हैं कि गर्मी के कारण पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। यदि उन्हें सही देखभाल नहीं मिलती तो वे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। जैसे इंसानों को लू लगती है, वैसे ही पशुओं को भी तापाघात (Heat Stroke) हो सकता है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन, त्वचा रोग और पाचन संबंधी समस्याएँ भी आम हो जाती हैं।

गर्मी में दुधारू पशुओं में होने वाली आम बीमारियाँ

1. तापाघात (Heat Stroke)

  • लक्षण: तेज़ सांसें लेना, सुस्ती, कभी-कभी बेहोशी
  • बचाव: ठंडा पानी पिलाएं और छायादार स्थान में रखें।

2. डिहाइड्रेशन (Dehydration)

  • लक्षण: सूखा मुंह, कम पेशाब, शरीर में कमजोरी
  • बचाव: पशुओं को दिन में कई बार ताजा और ठंडा पानी दें।

3. मास्टाइटिस (Mastitis)

  • लक्षण: थनों में सूजन, लालिमा, दूध में बदलाव
  • बचाव: साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें और थनों की नियमित जांच करें।

4. पाचन तंत्र की समस्याएं

  • लक्षण: दस्त, कब्ज, गैस
  • बचाव: संतुलित और हल्का आहार दें जो जल्दी पच जाए।

5. त्वचा संबंधी रोग

  • लक्षण: फोड़े, खुजली, जलन
  • बचाव: पशुशाला की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण जरूरी है

 डॉ. हेमंत तिवारी के सुझाव: ऐसे रखें गर्मी में पशुओं का ध्यान

  • ठंडा और साफ पानी: हमेशा पशुओं के लिए स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं।
  • छायादार स्थान: पशुओं को छाया या हवादार जगह पर रखें ताकि शरीर का तापमान सामान्य बना रहे।
  • संतुलित आहार: ऐसा आहार दें जो पचने में आसान हो और ऊर्जा प्रदान करे।
  • नियमित सफाई: पशुशाला की सफाई से बीमारियों का खतरा कम होता है।
  • पशु चिकित्सक से सलाह: किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्मी में दुधारू पशुओं की उचित देखभाल करना बेहद जरूरी है। यदि पशुपालक समय रहते सावधानी बरतें और डॉ. तिवारी जैसे विशेषज्ञों की सलाह मानें, तो न केवल पशुओं की सेहत बेहतर रहेगी, बल्कि दूध उत्पादन भी प्रभावित नहीं होगा।

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