23 मई को है अपरा एकादशी: व्रत से मिलती है यश, कीर्ति और अपार पुण्य की प्राप्ति

लखनऊ/सर्वोदय:- हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 23 मई 2025, गुरुवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति को अपार यश, सम्मान और धन की प्राप्ति होती है। साथ ही समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

विष्णु पूजन से होता है कल्याण

अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। श्रद्धालुओं को इस दिन चंदन, गंगाजल और कपूर से श्रीहरि का अभिषेक करना चाहिए। इस व्रत को श्रद्धा एवं नियमपूर्वक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक संदर्भ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने जब श्रीकृष्ण से इस एकादशी के महत्व के बारे में पूछा, तब श्रीकृष्ण ने बताया कि यह एकादशी न केवल अपार धन प्रदान करने वाली है, बल्कि व्रतधारी को कीर्ति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।

किन-किन पापों से मिलती है मुक्ति?

श्रीकृष्ण ने अपरा एकादशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस व्रत से ब्रह्महत्या, प्रेत बाधा, परनिंदा, असत्य भाषण, झूठी गवाही, छल-कपट से किए गए कर्म और गुरु का अपमान जैसे गंभीर पाप भी नष्ट हो जाते हैं। क्षत्रियों द्वारा युद्ध से पलायन और वैदिक शास्त्रों का अपमान करने जैसे कृत्यों से उत्पन्न दोष भी इस व्रत से समाप्त हो जाते हैं।

पुण्यफल की तुलना

शास्त्रों में बताया गया है कि जैसे तीनों पुष्करों में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, गंगा तट पर पिंडदान, कुंभ में तीर्थ यात्रा, सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान या नवप्रसूता गौ का दान करने से जो पुण्य मिलता है, वही फल एक अपरा एकादशी व्रत से सहज ही प्राप्त हो जाता है। यह व्रत पापों को नष्ट करने वाली कुल्हाड़ी और आत्मा को शुद्ध करने वाली अग्नि के समान है।

व्रत का फल

इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति विष्णुलोक को प्राप्त करता है और उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि इस व्रत की कथा का श्रवण और पाठ भी स्वयं में अत्यंत पुण्यकारी है और इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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