देश-विदेश/सर्वोदय:- पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना को पूरी ऑपरेशनल आज़ादी दे दी है, जिससे पाकिस्तान की चिंताएं और बढ़ गई हैं। ऐसे समय में भारत का एक ऐसा रणनीतिक ठिकाना, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं रहता, पाकिस्तान के लिए गंभीर खतरा बनकर उभर रहा है—ताजिकिस्तान का अयनी एयरबेस(Ayni Airbase)।
क्या है अयनी एयरबेस और भारत की इसमें भूमिका?
ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित अयनी एयरबेस पहले सोवियत सैन्य अड्डा था। 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद यह ताजिकिस्तान के नियंत्रण में आ गया। गृहयुद्ध के कारण यह काफी समय तक निष्क्रिय रहा।
भारत ने 2002 के बाद इस एयरबेस को पुनर्जीवित करने में दिलचस्पी दिखाई। इसके आधुनिकीकरण पर लगभग 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया। 2003 से 2010 के बीच रनवे को 3200 मीटर तक विस्तारित किया गया और इसे Ilyushin-76 और Su-30MKI जैसे युद्धक विमानों के लायक बनाया गया।
हालांकि, ताजिकिस्तान इसे सार्वजनिक रूप से विदेशी सैन्य अड्डा नहीं मानता, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां भारतीय वायुसेना के टेक्नीशियन, इंजीनियर और सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं।
भारत को क्या लाभ देता है अयनी एयरबेस?
पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव:
अयनी एयरबेस पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा के नज़दीक स्थित है। यहां से भारत बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी और अभियानों को अंजाम दे सकता है। इससे पाकिस्तान को दो मोर्चों पर रणनीतिक चुनौती झेलनी पड़ सकती है—एक पूर्व में कश्मीर और दूसरा पश्चिम में।
चीन पर नजर:
ताजिकिस्तान की सीमाएं चीन के शिनजियांग प्रांत से लगती हैं। अयनी एयरबेस से भारत चीन की गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है, खासकर गलवान संघर्ष के बाद यह पहलू और महत्वपूर्ण हो गया है।
अफगानिस्तान में बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण:
तालिबान के पुनः सत्ता में आने और IS-K जैसे आतंकी संगठनों की मौजूदगी के बीच, भारत इस बेस के माध्यम से अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्सों पर निगरानी रख सकता है।
मध्य एशिया में भारत का प्रभाव:
अयनी एयरबेस भारत को मध्य एशिया में एक प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है। जहां रूस और चीन पहले से सक्रिय हैं, वहीं यह बेस भारत को जियोपॉलिटिकल बैलेंस बनाने में मदद करता है।
पाकिस्तान को क्यों है डर?
रणनीतिक घेराबंदी: भारत अगर इस एयरबेस से फाइटर जेट्स या ड्रोन ऑपरेशन शुरू करता है, तो पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से चारों तरफ से घिरा महसूस हो सकता है।
परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर खतरा: पाकिस्तान के कई परमाणु ठिकाने उसके पश्चिमी हिस्से में हैं। अयनी एयरबेस से इन पर निगरानी आसान हो सकती है।
CPEC की सुरक्षा को चुनौती: चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), जो बलूचिस्तान से होकर गुजरता है, अब भारत की इस सामरिक मौजूदगी से दबाव में आ सकता है।
भविष्य में और बढ़ेगा महत्व
भारत ने अब तक अयनी एयरबेस को आधिकारिक रूप से ऑपरेशनल बेस घोषित नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इसकी अहमियत आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी। यह न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन और अफगानिस्तान की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण का जरिया बन सकता है।



