नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुणे से दिल्ली आ रहे छात्रों के एक समूह को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया है।
सीजेपी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर यह दावा किया गया है। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने भी वीडियो को पोस्ट करते हुए छात्रों को कथित तौर पर रोके जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति में इमरजेंसी क्यों नहीं घोषित कर दी जाती?
छात्रों को रास्ते में रोके जाने का दावा
सीजेपी का कहना है कि पुणे से छात्रों का एक समूह 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हुआ था। पार्टी के मुताबिक, छात्रों को रास्ते में ही रोक दिया गया और उन्हें बस में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान की ओर ले जाया गया।
पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में इसी कार्रवाई का दावा किया गया है। हालांकि, छात्रों को हिरासत में लिए जाने और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल
सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके ने छात्रों को कथित तौर पर रोके जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। दीपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि जब प्रदर्शनकारियों को इस तरह रोका जा रहा है तो फिर इमरजेंसी ही क्यों नहीं घोषित कर दी जाती।
अमित शाह पर भी साधा निशाना
इस मामले को लेकर सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कड़ी टिप्पणी की।
रांका ने दावा किया कि अगर सीजेपी अपने तेवर में आ गई तो सरकार के लिए जेल भी कम पड़ सकती हैं। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में पहले ही इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू हो चुकी है या फिर सरकार इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने से पहले तैयारी कर रही है।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है प्रदर्शन
सीजेपी की ओर से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा है कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा और छात्र शामिल हो सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों की संभावित संख्या को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है।
पहले भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी है सीजेपी
सीजेपी इससे पहले जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी है। पार्टी का दावा है कि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
अब पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। सीजेपी का दावा है कि इस मुद्दे पर उसे विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी प्रदर्शन में शामिल होने के संकेत दिए जाने की बात पार्टी की ओर से कही गई है।
हालांकि, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कितने लोग शामिल होंगे और प्रशासन की ओर से क्या अंतिम व्यवस्था की गई है, इसकी तस्वीर प्रदर्शन के दिन ही स्पष्ट होगी।


