लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जरी (CVTS) विभाग ने शनिवार को अपना स्थापना दिवस मनाया। समारोह में विभाग की अब तक की चिकित्सा उपलब्धियों, सर्जिकल सेवाओं के विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान विभाग से जुड़े वर्तमान चिकित्सकों, रेजिडेंट्स और पूर्व छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
CVTS विभाग संस्थान की स्थापना के समय से ही इसका हिस्सा रहा है, लेकिन 28 सितंबर 2011 को विभाग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई। इसी दिन विभाग में पहली कार्डियोथोरेसिक सर्जरी की गई थी। 14 वर्षीय बच्ची की पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) लिगेशन सर्जरी प्रो. डॉ. डी. के. श्रीवास्तव के नेतृत्व में की गई थी। इसके बाद विभाग ने लगातार अपनी सर्जिकल क्षमताओं का विस्तार किया।
अब हर दिन हो रहे 2 से 3 सर्जिकल केस
शुरुआती वर्षों में विभाग में सप्ताह के दौरान सीमित संख्या में ऑपरेशन किए जाते थे। वर्तमान में यहां प्रतिदिन करीब 2 से 3 सर्जिकल केस किए जा रहे हैं। विभाग में हृदय और छाती से संबंधित कई जटिल सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इनमें वाल्व सर्जरी, कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG), थोरेसिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी जैसी सेवाएं शामिल हैं। मरीजों की सर्जरी के बाद देखभाल के लिए विभाग में 19 बेड की ICU और 27 बेड का वार्ड भी उपलब्ध है।
हार्ट ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने पर जोर
स्थापना दिवस कार्यक्रम में RMLIMS के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह ने CVTS विभाग की प्रगति की सराहना की। उन्होंने संस्थान की ओर से विभाग को आगे भी आवश्यक सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया।
उन्होंने विभाग को भविष्य में हार्ट ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की दिशा में तैयारी आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे विभाग में उन्नत कार्डियक उपचार सुविधाओं के विस्तार की योजना का संकेत मिलता है।
चिकित्सा अधीक्षक और डीन ने दी शुभकामनाएं
संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह और डीन डॉ. राजन भटनागर ने भी CVTS विभाग की उपलब्धियों की सराहना की। दोनों ने विभाग के चिकित्सकों और पूरी टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

पूर्व छात्रों ने साझा किए अनुभव
समारोह में विभाग के फैकल्टी सदस्यों और वर्तमान रेजिडेंट्स के साथ बड़ी संख्या में पूर्व छात्र भी शामिल हुए। डॉ. अमित चौधरी, डॉ. संदीप गौतम, डॉ. अनुराग राय और डॉ. मनोज कुमार समेत विभाग के कई Alumni कार्यक्रम में मौजूद रहे।
पूर्व छात्रों ने विभाग में अपने कार्यकाल से जुड़ी यादें और अनुभव साझा किए। उन्होंने वर्तमान रेजिडेंट्स से बातचीत कर उन्हें मार्गदर्शन दिया और चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान विभाग की अलग-अलग पीढ़ियों के चिकित्सकों का एक साथ आना भी खास रहा। इससे विभाग की वर्षों में विकसित हुई कार्यसंस्कृति और चिकित्सा विरासत की झलक देखने को मिली।
विभाग के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प
स्थापना दिवस समारोह में वर्ष 2011 में हुई पहली कार्डियोथोरेसिक सर्जरी से लेकर वर्तमान में उपलब्ध कार्डियक, थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जिकल सेवाओं तक की यात्रा को याद किया गया।
कार्यक्रम के आयोजकों ने भविष्य में उन्नत हृदय संबंधी सेवाओं के विस्तार और मरीजों को बेहतर सर्जिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
समारोह के आयोजन में प्रो. डॉ. डी. के. श्रीवास्तव, डॉ. एन. के. श्रीवास्तव, डॉ. शरण्या राय, डॉ. जूही श्रीवास्तव, डॉ. त्रिना मंडल, डॉ. शौर्य भटनागर और डॉ. विवेक कुमार की भूमिका रही।


