लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RMLIMS), लखनऊ में कॉलेज ऑफ नर्सिंग और मनोरोग विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के मुख्य चिकित्सालय खंड की ओपीडी में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए किया गया।
इस वर्ष कार्यक्रम की वैश्विक थीम “चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड” (आत्महत्या पर विमर्श बदलें) रखी गई है। कार्यक्रम में आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी तोड़ने और लोगों के बीच संवेदनशील एवं खुले संवाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
नर्सिंग छात्रों ने नुक्कड़ नाटक और पोस्टर से दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान बीएससी नर्सिंग 2022 बैच के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक और पोस्टर के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य तथा आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेतों को पहचानने का संदेश दिया। छात्रों ने बताया कि समय रहते बदलावों को पहचानना और जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके बाद रोहित सिंह ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में आशा, संवेदनशीलता और जागरूकता का संदेश प्रमुख रहा।
विशेषज्ञों ने निर्णय रहित संवाद पर दिया जोर
कार्यक्रम में मनोरोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुरंजन ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों के साथ सहयोगात्मक तथा बिना किसी पूर्वाग्रह के संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ समुदाय के स्तर पर भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर संवेदनशील बातचीत को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई।
संस्थान के शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी रहे मौजूद
कार्यक्रम का आयोजन असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री इरम अंसारी और ट्यूटर सुश्री मनोरमा सिंह गौतम ने किया। यह आयोजन प्रो. (डॉ.) शिव कुमार मुद्गल, प्राचार्य; प्रो. निपिन कलाल, उप-प्राचार्य और डॉ. ए.क्यू. जिलानी, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोरोग विभाग के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर संस्थान के विभिन्न संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित मरीजों और उनके परिचारकों ने जागरूकता पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के माध्यम से RMLIMS ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने तथा संवेदनशील संवाद को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।


