न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज में लगातार हो रही बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रयागराज में हुए विकास कार्यों और जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि महाकुंभ के नाम पर प्रयागराज के तथाकथित ‘स्मार्ट डेवलपमेंट’ पर भारी रकम खर्च किए जाने के बावजूद शहर की यह स्थिति सवाल खड़े करती है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या अब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज से ‘जलराजनगर’ कर दिया जाएगा?
प्रयागराज के विकास कार्यों पर अखिलेश ने उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में प्रयागराज में जलभराव को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन विकास कार्यों को शहर को बेहतर बनाने के लिए किया गया था, बारिश के बाद उनकी जमीनी हकीकत सामने आ रही है।
उन्होंने ‘दिव्य’ विकास के दावे पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि शहर के कई हिस्सों में जलभराव की तस्वीरें सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं | हालांकि, अखिलेश यादव के इन आरोपों पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना बाकी है।
महाकुंभ के नाम पर जो 1 लाख करोड़ रुपए प्रयागराज के तथाकथित ‘स्मार्ट डेवलपमेंट’ के नाम पर ख़र्च किए गए थे, ये उस महा-भष्ट्राचार का जीता-जागता और बहता-बहाता प्रमाण है।
बनाने चले थे ‘दिव्य’; लेकिन हर तरह दिख रहा है ’द्रव्य’! अब क्या इलाहाबाद का नाम फिर से बदलकर प्रयागराज से… pic.twitter.com/dnh34r8oFS
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 18, 2026
लगातार बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव
प्रयागराज में लगातार बारिश के कारण प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया। जलभराव से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर आवागमन प्रभावित हुआ।
स्थिति का असर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी देखने को मिला। जलभराव के कारण न्यायाधीशों और अन्य लोगों को अदालत पहुंचने में परेशानी हुई और कोर्ट की कार्यवाही भी निर्धारित समय से देर से शुरू हुई।
हाईकोर्ट ने मामले का लिया स्वतः संज्ञान
प्रयागराज में जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के सामने यह मामला आया।
अदालत ने शहर में जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा है। कोर्ट ने प्रयागराज के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
सरकार से मांगा गया हलफनामा
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं नियोजन विभाग के सचिव को भी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हलफनामे में शहर में जलभराव से निपटने के लिए अब तक स्वीकृत योजनाओं, उनकी मौजूदा स्थिति और भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसके लिए प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी देने को कहा गया है।
बढ़ सकती है प्रशासन की जवाबदेही
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रयागराज में जलनिकासी और बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर प्रशासन की जवाबदेही बढ़ सकती है। अब जिला प्रशासन और नगर निगम को अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि जलभराव से बचाव के लिए क्या कदम उठाए गए और इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में पानी क्यों भर गया।
इस पूरे मामले के बीच अखिलेश यादव के ‘जलराजनगर’ वाले तंज ने प्रयागराज के विकास और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।



