न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम प्रशांत किशोर (पीके) और उनकी पार्टी जन सुराज के लिए अहम माना जा रहा है। लगातार दो चुनावी निराशाओं के बाद बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत को पार्टी अपनी पहली बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देख रही है। यह सिर्फ एक विधानसभा सीट की जीत नहीं, बल्कि जन सुराज के चुनावी सफर में पहली आधिकारिक जीत भी है।
विधानसभा चुनाव में नहीं चला था जन सुराज का जादू
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने राज्यभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया था। शुरुआती दौर में उन्होंने राघोपुर और करगहर जैसी सीटों से चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे, लेकिन बाद में स्वयं चुनाव मैदान में उतरने का फैसला बदल दिया।
जन सुराज ने राज्य की 243 में से 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। हालांकि, पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। चुनाव में जन सुराज को करीब 16.77 लाख वोट (3.47%) मिले, लेकिन वोट प्रतिशत सीटों में नहीं बदल सका। कई सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन करते हुए नोटा से भी पीछे रह गए।
शुरुआत में सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए गए थे, लेकिन पांच उम्मीदवारों ने नाम वापस लेने के कारण पार्टी 238 सीटों पर ही चुनाव लड़ सकी।
मतगणना में शुरुआती बढ़त भी नहीं बचा सकी थी पार्टी
विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान कुछ समय के लिए जन सुराज तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। इसके बाद यह संख्या घटकर दो और फिर एक रह गई। सुबह लगभग 10:30 बजे के बाद पार्टी सभी सीटों पर पिछड़ गई और जीत की दौड़ से बाहर हो गई।
2024 के उपचुनाव में भी मिली थी निराशा
इससे पहले 2024 में हुए चार विधानसभा उपचुनावों में भी जन सुराज को सफलता नहीं मिली थी। पार्टी ने अतरी, तरारी, इमामगंज और रामगढ़ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन चारों स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा।
इन चुनावों में चार में से तीन उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। इमामगंज, बेलागंज और तरारी में पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जबकि रामगढ़ में उसका उम्मीदवार शीर्ष तीन उम्मीदवारों में भी जगह नहीं बना पाया।
बांकीपुर से खुला जीत का खाता
लगातार दो चुनावी असफलताओं के बाद बांकीपुर उपचुनाव ने जन सुराज को बड़ी राहत दी। इस जीत के साथ पार्टी ने पहली बार किसी चुनाव में जीत दर्ज की। राजनीतिक जानकार इसे प्रशांत किशोर के लिए मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
भाजपा के गढ़ में लड़ी प्रतीकात्मक लड़ाई
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में जन सुराज ने यहां मुकाबले को सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बनाया।
प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने चुनाव को बेहतर नेतृत्व और सुशासन के विकल्प से जोड़ते हुए कहा था कि यह सिर्फ विधायक चुनने का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है।
स्थानीय मुद्दों पर रहा चुनावी फोकस
बांकीपुर उपचुनाव में मतदान 35 प्रतिशत से भी कम रहा। चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज ने ट्रैफिक व्यवस्था, सफाई, शहरी विकास, प्रशासनिक कामकाज और नागरिक सुविधाओं जैसे स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय समस्याओं को केंद्र में रखकर चलाए गए अभियान और सत्ता विरोधी माहौल का लाभ जन सुराज को मिला, जिसके चलते पार्टी पहली बार चुनावी जीत दर्ज करने में सफल रही।



