Sunday, July 12, 2026

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नए वोटर बनने के नियम में बदलाव, फॉर्म-6 में जुड़ा नया कॉलम; अब देनी होगी SIR से जुड़ी जानकारी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में अहम बदलाव किया गया है। चुनाव आयोग के ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जिसमें आवेदकों से पूछा जा रहा है कि क्या उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान मतदाता सूची में दर्ज था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल यह बदलाव केवल ऑनलाइन फॉर्म में दिखाई दे रहा है। वेबसाइट से डाउनलोड की जाने वाली फॉर्म-6 की हार्ड कॉपी में अभी यह नया कॉलम शामिल नहीं है।

SIR के बाद नए वोटरों पर क्या असर पड़ सकता है?

देश के कई राज्यों में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 5.58 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जिन परिवारों के नाम सूची से हटे हैं, उनके नए मतदाता बनने वाले सदस्यों के सामने कुछ सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि किसी आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी का नाम SIR के बाद मतदाता सूची में नहीं है, तो क्या उनके बच्चों या पोते-पोतियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे या नहीं।

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर हुआ था विवाद

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला था। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसके चलते वे चुनाव में मतदान नहीं कर सके।

फॉर्म-6 में कौन-कौन से नए विकल्प जोड़े गए?

चुनाव आयोग के ECINRT पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म-6 में ‘J’ और ‘K’ सेक्शन जोड़े गए हैं। इनमें आवेदक से उसके या उसके परिवार की SIR से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है।

आवेदक के सामने तीन विकल्प दिए गए हैं—

  • पहला: मेरा नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज है।
  • दूसरा: मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज है।
  • तीसरा: न मेरा और न ही मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में था।

तीसरा विकल्प चुनने पर क्या होगा?

यदि आवेदक पहला या दूसरा विकल्प चुनता है, तो उसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक (Serial Number) की जानकारी भी भरनी होगी।

वहीं, यदि तीसरा विकल्प चुना जाता है, तो फिलहाल आगे कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाती। हालांकि यह कॉलम अनिवार्य नहीं बताया गया है और चुनाव आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने वाले आवेदनों की आगे क्या प्रक्रिया होगी।

किन राज्यों में लागू है नया बदलाव?

यह नया विकल्प केवल उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई दे रहा है, जहां वर्ष 2025-26 के दौरान SIR प्रक्रिया पूरी की गई है। बिहार, जहां सबसे पहले SIR कराया गया था, फिलहाल इस बदलाव से अलग रखा गया है। वहीं असम में अब तक SIR लागू नहीं किया गया है।

क्या चुनाव आयोग स्वयं फॉर्म-6 में बदलाव कर सकता है?

कानूनी जानकारों के अनुसार, Representation of the People Act, 1950 की धारा 28 के तहत चुनाव संबंधी नियमों में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। यह बदलाव चुनाव आयोग से परामर्श के बाद राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करके किया जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, भारत के प्रत्येक पात्र वयस्क नागरिक को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है, जब तक कि उसे किसी कानूनी आधार पर अयोग्य घोषित न किया गया हो।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार का संशोधन करने से पहले कानून मंत्रालय की अधिसूचना आवश्यक होती है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग अपने स्तर पर फॉर्म में बदलाव नहीं कर सकता। इससे पहले वर्ष 2021 में संसद ने कानून में संशोधन कर चुनाव आयोग को मतदाताओं से आधार संख्या लेने का अधिकार दिया था, जिसकी अधिसूचना 17 फरवरी 2022 को जारी की गई थी।

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