Thursday, July 2, 2026

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यूपी की हर पंचायत को मिलेंगे सचिव,13,116 पंचायत सचिवों की भर्ती को मंजूरी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण प्रशासन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 13,116 पंचायत सचिवों की भर्ती के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। भर्ती पूरी होने के बाद प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग पंचायत सचिव तैनात करने की योजना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

तीन चरणों में होगी भर्ती

पंचायती राज विभाग के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 4,372 पंचायत सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण में भी लगभग इतनी ही संख्या में भर्ती कर सभी स्वीकृत पदों को भरा जाएगा।

शासन से मिली सैद्धांतिक मंजूरी

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में पंचायती राज, वित्त और ग्राम्य विकास विभाग ने भर्ती प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी। इसके साथ ही प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग पंचायत सचिव नियुक्त करने की योजना को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।

पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से बैठक के कार्यवृत्त (Minutes) भी जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

हजारों पद अभी भी खाली

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में करीब 58 हजार ग्राम पंचायतें हैं, जबकि इनमें से लगभग 42 हजार पंचायतों में पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं।

पद खाली होने के कारण कई पंचायत सचिव, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी एक साथ कई ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। इससे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।

आगे और भी भर्तियां होंगी

सरकार की योजना केवल 13,116 पदों तक सीमित नहीं है। इन नियुक्तियों के बाद भी शेष रिक्त पदों को भरने के लिए आगे नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संबंध में स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी भविष्य में अलग से निर्णय लेगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। पंचायत सचिव की उपलब्धता से सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा, विकास कार्यों की निगरानी बेहतर होगी और ग्रामीणों की शिकायतों का निस्तारण भी पंचायत स्तर पर ही किया जा सकेगा।

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