Gold Price Today: सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड ने कई वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन दर्ज किया। कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गईं और पूरे महीने में करीब 12% की गिरावट दर्ज की गई। इसे अक्टूबर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट माना जा रहा है।
ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या फिर सोने में अभी और कमजोरी आ सकती है।
तीन महीनों में करीब 20% टूटा सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड बुधवार को करीब 3,975 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। इससे एक दिन पहले कीमतें लगभग 3,943 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थीं, जो पिछले साल नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
वहीं, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 4,000 डॉलर के नीचे फिसलकर करीब 3,988 डॉलर प्रति औंस पर आ गए। पिछले तीन महीनों में सोने की कीमतों में लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, एक साल के मुकाबले सोना अभी भी करीब 20% की बढ़त पर बना हुआ है।
क्यों टूटी सोने की कीमत?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आने से निवेशकों का रुझान सोने से हटकर बॉन्ड की ओर बढ़ा है।
- अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग कमजोर हुई है।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका भी बाजार पर दबाव बना रही है।
- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
तिमाही आधार पर भी कमजोर रहा गोल्ड
जून 2026 केवल मासिक आधार पर ही नहीं बल्कि तिमाही प्रदर्शन के लिहाज से भी सोने के लिए बेहद कमजोर रहा। बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह जून 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट मानी जा रही है।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अल्पकाल में सोने में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट अवसर साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतों में और कमजोरी आती है तो चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की कमजोरी कुछ राहत दे सकती है, क्योंकि इससे घरेलू बाजार में गिरावट का असर सीमित रह सकता है।
आगे कैसी रह सकती है चाल?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि सोना 4,000 डॉलर के नीचे बना रहता है तो कीमतें 3,600 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं। वहीं, यदि बाजार में खरीदारी लौटती है तो 4,100 से 4,165 डॉलर तक की रिकवरी देखने को मिल सकती है।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर संबंधी फैसलों पर रहेगी। इन दोनों कारकों से आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय होने की संभावना है।



