न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में लगाए गए एक पोस्टर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी युवजन सभा की ओर से जारी पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में हाथ में संविधान की प्रति लिए हुए दर्शाया गया। पोस्टर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
जन्मदिन पर हवन-पूजन और पोस्टर जारी
अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में समाजवादी युवजन सभा के करीब 25 से 30 कार्यकर्ताओं ने हवन-पूजन का आयोजन किया। इसी दौरान जारी पोस्टर में उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के प्रतीकात्मक स्वरूप में दिखाया गया, जिसके हाथ में संविधान की प्रति नजर आ रही है।
सपा नेता ने बताई पोस्टर की मंशा
समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश महासचिव अजय फौजी ने कहा कि पोस्टर का उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि संविधान और न्याय के प्रति अखिलेश यादव की प्रतिबद्धता को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म और न्याय की स्थापना का संदेश दिया था और उसी भावना के अनुरूप अखिलेश यादव भी संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय की बात करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे कथित विवाद पर आवाज उठाना भी जनहित और पारदर्शिता की मांग का हिस्सा है।
BJP ने जताई कड़ी आपत्ति
पोस्टर को लेकर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को भगवान के स्वरूप में प्रस्तुत करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग उचित नहीं है और इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के संबंधित कार्यकर्ताओं से इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है।
पोस्टर पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
इस पोस्टर के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे संविधान, न्याय और सामाजिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रतीक बता रही है, वहीं बीजेपी इसे धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का मामला बताते हुए सपा पर निशाना साध रही है।
फिलहाल यह पोस्टर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है और दोनों दल अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने हैं।



