लखनऊ/अयोध्या(सर्वोदय न्यूज़): अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मामले का राजनीतिकरण न करने की भी अपील की।
मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी खबरें अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं होगा।
दूसरे प्रमुख मंदिरों जैसी व्यवस्था अपनाने की सलाह
बसपा प्रमुख ने कहा कि भविष्य में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर किसी प्रकार की शिकायत न आए, इसके लिए देश के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में अपनाई जा रही पारदर्शी लेखा-व्यवस्था और निगरानी प्रणाली से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अयोध्या में भी ऐसी ही व्यवस्था लागू की जाए ताकि चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
धर्म और राजनीति को अलग रखने की नसीहत
मायावती ने अपने बयान में राजनीतिक दलों को भी नसीहत देते हुए कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध-धर्मीकरण लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए उचित नहीं है।
पहले अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा
राम मंदिर चढ़ावा मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से उठाया था। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों का खंडन किया। हालांकि बाद में विभिन्न राजनीतिक दलों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने भी इस मामले में सवाल उठाए, जिससे ट्रस्ट पर जांच का दबाव बढ़ा।
एसआईटी जांच के बाद हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान करीब 80 लाख रुपये बरामद किए गए।
जांच आगे बढ़ने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। वहीं अयोध्या के कुछ अधिवक्ताओं ने भी इस मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।



