लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और बिजली की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ऊर्जा विभाग को प्रदेशभर में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। रविवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव हो या शहर, आमजन को बिजली संकट का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सभी स्तरों पर लगातार मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में ऊर्जा मंत्री Arvind Kumar Sharma और राज्य मंत्री Kailash Singh Rajput सहित ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और विभिन्न डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती खपत को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जाए। साथ ही सभी पावर प्लांटों में तकनीकी दक्षता और नियमित रखरखाव को प्राथमिकता दी जाए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता अब बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें तापीय विद्युत गृहों के साथ जल विद्युत और संयुक्त उपक्रमों से मिलने वाली बिजली भी शामिल है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता के लिए ट्रांसमिशन व्यवस्था की मजबूती बेहद जरूरी है। अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में इस समय 60 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं और नेटवर्क की उपलब्धता 99 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।
बैठक में बिजली वितरण व्यवस्था को उपभोक्ता केंद्रित बनाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फीडरवार जवाबदेही तय की जाए और ट्रांसफॉर्मर खराब होने या शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान के दौरान फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि हाल में आए आंधी-तूफान के दौरान कई सब-स्टेशन और फीडर प्रभावित हुए थे, लेकिन मरम्मत और बहाली का कार्य तेजी से पूरा कराया गया। मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी कमी आई है। वर्ष 2022-23 के मुकाबले वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाएं लगभग 80 प्रतिशत तक कम हुई हैं। अधिकारियों ने इसका श्रेय सुरक्षा तंत्र की मजबूती, समयबद्ध मरम्मत और जवाबदेही तय किए जाने को दिया।
ऊर्जा विभाग की ओर से बताया गया कि अप्रैल और मई में तापमान बढ़ने के कारण प्रदेश में बिजली मांग लगातार बढ़ी है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत बिजली मांग 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई। वहीं पीक डिमांड 30 हजार मेगावाट के पार चली गई। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2029 तक अतिरिक्त विद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
बैठक में स्मार्ट मीटर व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 89 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार के निर्देश पर सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड प्रणाली में बदला जा रहा है। जून 2026 से उपभोक्ताओं को हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड बिल जारी किए जाएंगे। बिल की जानकारी एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं बल्कि किसानों की सिंचाई, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास से जुड़ा अहम विषय है। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।



