न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 4 मई को सुनवाई के दौरान उस वक्त तीखी टिप्पणी देखने को मिली, जब देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कोर्ट की रजिस्ट्री के कामकाज से नाराज़ हो गए। मामला आयुषी मित्तल बनाम राजस्थान राज्य से जुड़ा था। उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बहुत ही खराब तरीके से काम कर रही है। CJI सूर्यकांत सूर्यकांत इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “बहुत ही खराब रजिस्ट्री है। यहाँ बैठा हर व्यक्ति खुद को भारत का ‘सुपर चीफ जस्टिस’ समझता है।”
इसके बाद उन्होंने पूछा, “ED डायरेक्टर को नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया?” उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या ऐसा कोई आदेश पारित नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल इस बात की जाँच करें कि हमारे मार्च 2026 के आदेश का मतलब ED को नोटिस क्यों नहीं माना गया? प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement) को नोटिस तुरंत भेजा जाए।”
रजिस्ट्री के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बेहद खराब तरीके से काम कर रही है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यहां बैठे लोग खुद को “सुपर चीफ जस्टिस” समझने लगे हैं।
ED को नोटिस न भेजने पर नाराज़गी
CJI ने यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डायरेक्टर को नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या मार्च 2026 में दिए गए आदेश के बावजूद नोटिस नहीं भेजा गया।
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तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिए कि इस मामले की जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आदेश के बावजूद ED को नोटिस क्यों नहीं भेजा गया। साथ ही उन्होंने तुरंत नोटिस जारी करने को कहा।
कोर्ट में सख्त रुख
CJI का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही पर उन्होंने नाराज़गी जाहिर की।



