न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक साथ कई राजनीतिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। यह पहली बार है जब भाजपा को उस राज्य में सत्ता हासिल हुई है, जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी का गहरा जुड़ाव रहा है। लंबे समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर नरेंद्र मोदी, बंगाल में जीत को एक बड़े लक्ष्य के रूप में देखते रहे हैं।
‘गंगा एक्सप्रेसवे’ के रूप में देखी जा रही जीत
भाजपा की इस सफलता को राजनीतिक तौर पर “गंगा एक्सप्रेसवे” की संज्ञा दी जा रही है। इसका मतलब है कि गंगा नदी के उद्गम से लेकर सागर में मिलने तक के प्रमुख राज्यों में भाजपा की मजबूत उपस्थिति बन गई है।
गंगोत्री से निकलने वाली गंगा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार होते हुए गंगासागर तक पहुंचती है। इन राज्यों में अब भाजपा की सरकार या मजबूत राजनीतिक पकड़ होने से पार्टी की स्थिति और सशक्त मानी जा रही है।
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हालांकि झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, फिर भी गंगा के प्रमुख प्रवाह वाले राज्यों में पार्टी का प्रभाव व्यापक रूप से बढ़ा है।
पूर्वी भारत में बढ़ी ताकत
इस जीत का असर सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पूर्वी भारत में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। ओडिशा में पहले ही पार्टी को हालिया चुनावों में बड़ी सफलता मिल चुकी है। अब पश्चिम बंगाल में जीत के बाद बिहार, ओडिशा और बंगाल जैसे अहम राज्यों में भाजपा का दबदबा बढ़ गया है।
देशभर में बढ़ती पकड़
भाजपा ने उत्तर, पश्चिम और पूर्व भारत में अपनी स्थिति को काफी हद तक मजबूत कर लिया है। असम में लगातार जीत, और महाराष्ट्र, गुजरात व गोवा जैसे पश्चिमी राज्यों में सत्ता ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़त दिलाई है।
वहीं विपक्ष का दायरा सीमित होता नजर आ रहा है, जो अब कुछ ही राज्यों तक सिमट गया है। 2024 के आम चुनावों के बाद भाजपा के प्रभाव को लेकर उठे सवालों के बीच राज्यों में मिली यह जीत पार्टी के लिए नई ऊर्जा का काम कर रही है।



