लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मशहूर कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता सुनाकर समाजवादी पार्टी पर तीखा तंज कसा। सदन में बोलते हुए सीएम ने पंक्तियां पढ़ीं— “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का… जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर।”
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार जाति के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और सुशासन के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को 10वां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।
सपा पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इंसेफेलाइटिस से हर साल 1500 से 1700 तक एससी-एसटी वर्ग के बच्चों की मौत होती थी, लेकिन 2019 के बाद से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी जाति नहीं देखी, बल्कि सभी वर्गों के लिए काम किया।
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इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा नेता शिवपाल सिंह यादव पर भी कटाक्ष किया। योगी ने कहा कि कुछ जिलों की पहचान ऐसी बना दी गई थी कि लोग वहां के नाम से ही दूरी बना लेते थे, लेकिन अब प्रदेश की छवि बदली है।
निजी विश्वविद्यालयों पर छिड़ी बहस
वहीं, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने ग्रेटर नोएडा स्थित गल्गोटियास विश्वविद्यालय को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों की फीस संरचना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा के नाम पर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उनके बयान पर सदन में हल्के ठहाके भी लगे।
सदन में हल्का-फुल्का माहौल
रोजगार और राजस्व संहिता पर चर्चा के दौरान माता प्रसाद पांडेय ने मुस्कुराते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री को प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि झंझावात बहुत हैं।” इस पर सदन में कुछ देर के लिए सहज और हल्का माहौल देखने को मिला।
बजट सत्र के अंतिम दिन कविता, कटाक्ष और आंकड़ों के जरिए सियासी गर्मी अपने चरम पर रही। अब देखना यह होगा कि इस बहस का राजनीतिक असर आगे किस रूप में सामने आता है।



