नई दिल्ली/इस्लामाबाद: United States और Iran के बीच Islamabad में अहम शांति वार्ता होने जा रही है, लेकिन इसी के साथ अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत भी तेजी से बढ़ा दी है। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों एक साथ चल रही हैं।
वार्ता में शामिल होंगे बड़े नेता
इस बातचीत में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की भारी तैनाती
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले ही अपने फाइटर जेट्स और हमलावर विमान क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं। इसके अलावा अमेरिकी सेना की प्रतिष्ठित 82nd Airborne Division के 1500–2000 सैनिकों को भी भेजे जाने की तैयारी है।
समुद्र में भी हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS George H. W. Bush अटलांटिक पार कर रहा है, जबकि USS Boxer और 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट प्रशांत क्षेत्र से खाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं।
आमतौर पर मध्य पूर्व में करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 50,000 से ज्यादा हो चुकी है।
ईरान की शर्तें और सख्त रुख
ईरान बातचीत के लिए तैयार जरूर है, लेकिन उसने कुछ अहम शर्तें रखी हैं। Lebanon में तुरंत युद्धविराम लागू करना उसकी प्रमुख मांग है।
गालिबाफ ने साफ कहा है कि ईरान की नीयत सकारात्मक है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत सिर्फ दिखावा साबित हुई, तो ईरान सख्त कदम उठा सकता है।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि युद्धपोतों पर हथियार तैयार रखे जा रहे हैं और अगले 24 घंटों में स्थिति साफ हो सकती है।
अमेरिका की ‘दोहरी रणनीति’
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका इस समय “डुअल स्ट्रेटेजी” अपना रहा है एक तरफ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करना है |
इसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना और बातचीत में बढ़त हासिल करना है। साथ ही, अगर वार्ता विफल होती है, तो तुरंत कार्रवाई के लिए तैयारी रखना भी इसका हिस्सा है।
वैश्विक असर और बढ़ती चिंता
यह संघर्ष अब करीब छह हफ्तों से जारी है और इसका असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। Strait of Hormuz, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, वहां अस्थिरता के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, जब यह तय होगा कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या संघर्ष की दिशा में।



