न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर विभाग में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए लखनऊ विशेष अनुसंधान शाखा में तैनात अपर आयुक्त संजय कुमार मिश्र, संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार सिंह और उपायुक्त धनश्याम मधेशिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इन अधिकारियों पर बिना माल के 5 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास कराने का गंभीर आरोप है। विशेष सचिव, राज्य कर श्याम प्रकाश नारायण ने इनके निलंबन का आदेश जारी किया।
कैसे हुआ ITC घोटाला?
जांच में पाया गया कि नीचे दिए गए चार वाहनों के नाम पर बिना किसी वास्तविक माल के ई-वे बिल जारी किए गए UP 82 T 9714, HR 63 E 9906, SR 38 T 9341, PB 10 V 5297 ये ई-वे बिल आकाश कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली से बिल्ड-टू: गासपेल प्रेस, सी-135 निराला नगर, लखनऊ शिप-टू गासपेल प्रेस, नादरगंज, अमौसी, लखनऊ के नाम पर बनाए गए। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने न तो किसी वाहन मालिक, चालक या ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई की, न ही कोई FIR दर्ज कराई।
जांच में लापरवाही और गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं तलाशी के दौरान अधिकारियों ने न तो फैक्ट्री गेट का CCTV फुटेज मांगा, न ही उसका रिकॉर्ड जोड़ा। माल आने के गेट रजिस्टर की एंट्री चेक नहीं की गई, जबकि बाद में पाया गया कि वह रजिस्टर अधिकारियों ने व्यापारी से लिया था। रिपोर्ट में व्यापारी के बयान पर भरोसा करके दिखा दिया गया कि “चारों वाहनों का माल फैक्ट्री में आया”, जबकि कोई भौतिक सत्यापन नहीं किया गया।
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स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध न होने के बावजूद 3.57 करोड़ के स्टॉक को सही मान लिया गया और सिर्फ 44.87 लाख का जुर्माना लगाया गया। नियम के अनुसार, जुर्माना माल की लागत के बराबर होना चाहिए था, लेकिन केवल टैक्स के बराबर जुर्माना लगाया गया। इसके बाद 5 करोड़ रुपये का कपटपूर्ण ITC क्लेम कर लिया गया।
इन सभी अनियमितताओं को व्यापारी को “अनुचित लाभ” पहुंचाने की मंशा से किया गया माना गया है। इसी आधार पर योगी सरकार ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की।



