लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में होने वाली सरकारी भर्तियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब विभागों को रिक्त पदों का प्रस्ताव भेजने से पहले अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित पदों की संख्या स्पष्ट करनी होगी। आरक्षित पदों की गणना तय होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य भर्तियों में आरक्षण को लेकर उठने वाले विवादों को पूरी तरह समाप्त करना है। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग आयोगों के साथ बैठक कर पदों के बंटवारे को अंतिम रूप देंगे, ताकि बाद में किसी प्रकार की आपत्ति या कानूनी अड़चन न आए।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती और लेखपाल भर्ती जैसे मामलों में विपक्षी दलों ने आरक्षण नियमों के पालन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। कुछ मामलों में विवाद उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी पार्टियों ने भी समय-समय पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। ऐसे में सरकार इस बार किसी भी प्रकार की चूक से बचना चाहती है।
लेखपाल भर्ती में हुआ था विवाद
7994 लेखपाल पदों की भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत 1441 पद दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। विपक्षी दलों ने इसे आरक्षण में कटौती बताते हुए विरोध दर्ज कराया था। बाद में पदों की संख्या में संशोधन किया गया। इसी तरह के विवादों से बचने के लिए अब पहले से ही सभी श्रेणियों के पदों का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा।
आयोगों को जारी किए गए निर्देश
राज्य में भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड सहित अन्य आयोग कार्य करते हैं। शासन द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि राज्य की सेवाओं में लागू ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था का पूरी तरह पालन किया जाए।
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साथ ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 के प्रावधानों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या कानूनी पेंच न फंसे।
सरकार का मानना है कि स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने से भर्ती प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी होगी और किसी को भी आरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाने का अवसर नहीं मिलेगा।



