कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति की ओर से सभी आगंतुकों का विधिवत स्वागत किया गया तथा प्रसाद और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई।
विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के जीवन और योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आध्यात्मिक प्रभाव और संगठन कौशल से सुग्रीव किला को विशिष्ट पहचान दिलाई। वर्ष 1987 में माता सीता सहित भगवान श्रीराम के नवीन विग्रह की स्थापना कर उन्होंने इस प्राचीन धाम को आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया। मंदिर आंदोलन के समय भी सुग्रीव किला संतों की गतिविधियों का अहम केंद्र रहा।
समारोह में उपस्थित संत-महात्माओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया। पुण्यतिथि के अवसर पर सुग्रीव किला परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का भाव वातावरण में परिलक्षित होता रहा।



