न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत उनकी गिरफ्तारी को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जिसके बाद उन्हें रिहा किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
इस मामले में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए कहा था कि अदालत इस सप्ताह वांगचुक के भाषणों से जुड़े वीडियो देखेगी। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. एंग्मो ने रासुका के तहत हुई हिरासत को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर अंतिम सुनवाई 17 मार्च को तय की गई थी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने कहा था कि जज पहले अलग-अलग वीडियो देखेंगे और उसके बाद दोनों मिलकर उनकी समीक्षा करेंगे। इसके लिए अदालत ने रजिस्ट्रार को वीडियो की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया था।
केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने अदालत को बताया था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अस्वस्थ हैं, इसलिए सुनवाई टालने का अनुरोध किया गया था। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि मामले में बार-बार स्थगन से देश में गलत संदेश जा रहा है।
पीठ ने स्पष्ट किया था कि अगली सुनवाई 17 मार्च को अंतिम रूप से होगी और उस दिन बहस पूरी होने के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रखेगी। अदालत ने यह भी कहा था कि उस दौरान किसी नए मुद्दे पर बहस की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह भी पढ़े:- पेट्रोल-डीजल सेफ, तो फिर LPG गैस कैसे हो गई ‘आउट ऑफ स्टॉक’?पूरी पड़ताल
इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई होली की छुट्टियों के बाद तक के लिए टाल दी थी। इस मामले में पहले भी कई बार सुनवाई स्थगित हो चुकी थी, क्योंकि विभिन्न पक्षों के वकील उपलब्ध नहीं थे।
वहीं केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने अदालत को बताया था कि वांगचुक को सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को भड़काने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। प्रशासन का कहना था कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और 161 लोग घायल हुए थे, जिसके बाद कार्रवाई की गई थी।



