प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि कोई पहले से शादीशुदा व्यक्ति किसी महिला से शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध का अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने एक शिक्षक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने से इनकार कर दिया है, जिस पर अपनी छात्रा के साथ दस वर्षों से अधिक समय तक शारीरिक संबंध बनाए रखने का आरोप है।
यह टिप्पणी जस्टिस अवनीश सक्सेना ने कुलदीप वर्मा नामक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए की। आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद आरोपों के अनुसार, आरोपी पीड़िता के साथ संबंध बनाने से पहले ही शादीशुदा था। ऐसे में उससे शादी करने का कथित वादा प्रथम दृष्टया धोखे से यौन संबंध की श्रेणी में आता है, जो BNS की धारा 69 के तहत दंडनीय अपराध है।
पीड़िता के आरोप
पीड़िता ने 20 जून 2025 को अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, वह वर्ष 2014-15 से आरोपी के साथ रिश्ते में थी और आरोपी ने उसे पत्नी की तरह रखा, लेकिन कानूनी रूप से शादी करने से हमेशा इनकार करता रहा।
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पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने केवल आर्य समाज मंदिर में विवाह की औपचारिकता पूरी की, जबकि बाद में उसे यह जानकारी मिली कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे भी हैं।
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि शारीरिक संबंधों के दौरान आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और विरोध करने पर बदनाम करने की धमकी दी।
आरोपी की दलील
वहीं आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि उसके और पीड़िता के बीच संबंध आपसी सहमति से थे और वर्ष 2014 से चले आ रहे थे। उसने यह भी कहा कि शादी के झूठे वादे का आरोप टिकता नहीं है, क्योंकि पीड़िता के कथन के अनुसार, दोनों के बीच आर्य समाज मंदिर में पहले ही शादी हो चुकी थी।
कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने शुरुआती स्तर पर कहा कि आरोपों के अनुसार, दोनों के बीच पहला शारीरिक संबंध पीड़िता की बेहोशी की अवस्था में बना और बाद में शादी के कथित झूठे वादे के आधार पर संबंध जारी रहे।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता को आरोपी की पूर्व वैवाहिक स्थिति की जानकारी थी या नहीं, यह एक तथ्यात्मक प्रश्न है, जिसकी जांच ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।



