Tuesday, March 24, 2026

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गोरखपुर में मंच पर भावुक हुए संजय निषाद, आरक्षण और उत्पीड़न के मुद्दे पर छलके आंसू

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने रविवार को गोरखपुर के महंत दिग्विजय नाथ पार्क से शक्ति प्रदर्शन के साथ चुनावी हुंकार भरी। कार्यक्रम महंत दिग्विजय नाथ पार्क में हुआ, जहां बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। हालांकि इस पूरे आयोजन की सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री के भावुक होकर मंच पर रोने को लेकर रही।

मंच पर भावुक हुए, लगाए गंभीर आरोप

अपने संबोधन के दौरान संजय निषाद निषाद समाज के मुद्दों को उठाते-उठाते भावुक हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी समाज की बहू-बेटियों के साथ उत्पीड़न हो रहा है और दशकों से चला आ रहा शोषण खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों का हक छीना जा रहा है और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा।

उन्होंने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी निषाद के खिलाफ कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है। खास बात यह रही कि ये बयान उन्होंने खुद सरकार में रहते हुए दिया।

आरक्षण और चुनावी रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। संजय निषाद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की करीब 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और पार्टी इन सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी।

साथ ही उन्होंने 5 अप्रैल तक प्रदेशभर में चार बड़ी रैलियां करने का भी ऐलान किया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय निषादों को अपराधी वर्ग में रखा गया था और आजादी के बाद भी उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल पाया।

सियासी संदेश या भावनात्मक अपील?

राजनीतिक जानकार संजय निषाद के इस भावुक अंदाज को एक रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर प्रगति न होने से समाज में बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह का भावनात्मक प्रदर्शन एक तरफ जहां समर्थकों को जोड़ने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने का संकेत भी देता है।

क्या है बड़ा संकेत?

इस पूरे घटनाक्रम को आगामी चुनावों से पहले दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। 160 सीटों पर दावेदारी और मंच से दिया गया संदेश यह संकेत देता है कि निषाद पार्टी आने वाले समय में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में है।

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