न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली और स्विट्ज़रलैंड में पीएचडी कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या की धमकी दी है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कई भावुक पोस्ट लिखते हुए चंद्रशेखर पर मानसिक और भावनात्मक शोषण का आरोप लगाया।
रोहिणी ने लिखा, “आप सभी को मेरा अंतिम अलविदा। आज ही तेरे नाम का ज़हर खाऊंगी।” उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि तीन साल तक चले निजी रिश्ते में उन्हें धोखा दिया गया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
डॉ. रोहिणी ने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली पुलिस को भी टैग करते हुए लिखा कि उनकी बात किसी ने नहीं सुनी और अब वह मानसिक रूप से टूट चुकी हैं।
क्या हैं आरोप?
डॉ. रोहिणी का कहना है कि 2020 में उनकी चंद्रशेखर से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद उनका रिश्ता शुरू हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- चंद्रशेखर ने शादी का वादा कर उनके साथ संबंध बनाए।
- जब उन्होंने विरोध किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
- निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।
- चंद्रशेखर ने अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाई और उन्हें राजनीतिक अभियानों में इस्तेमाल किया।
उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखर रिश्ते के दौरान उन्हें आत्महत्या की धमकियाँ देकर मानसिक रूप से बांधे रखते थे।
राजनीतिक साजिश या गंभीर आरोप?
भीम आर्मी ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है और चंद्रशेखर ने अब तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने कहा है कि वह केवल कोर्ट में ही अपना पक्ष रखेंगे।
महिला आयोग और पीएमओ से लगाई न्याय की गुहार
डॉ. रोहिणी ने राष्ट्रीय महिला आयोग, दिल्ली पुलिस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि “लाखों महिलाओं के आत्मसम्मान की लड़ाई” है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण वे गहरे अवसाद में चली गई थीं और दो बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी हैं।
कौन हैं डॉ. रोहिणी घावरी?
डॉ. रोहिणी घावरी वाल्मीकि समाज से आती हैं और स्विट्ज़रलैंड में पीएचडी कर रही हैं। 2019 में मध्य प्रदेश सरकार से उन्हें एक करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप प्राप्त हुई थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने ‘जय श्री राम’ का उद्घोष कर चर्चा बटोरी थी। वे ‘जनपावर फाउंडेशन’ के माध्यम से दलित समाज के अधिकारों के लिए कार्यरत हैं।



