न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पूरे गांधी परिवार के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है। याचिका में सरकारी भूमि में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। इस मामले में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, जिलाधिकारी सहित कुल 45 लोगों को पक्षकार बनाया गया है। एपीएमएल कोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए शहर कोतवाली पुलिस से रिपोर्ट तलब की है और सुनवाई की अगली तारीख 9 फरवरी तय की है।
पाजा फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष बृजेंद्र शरण श्रीवास्तव और वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष लाखन सिंह की ओर से एमपीएमएल कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी भूमि और तालाब की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भवन निर्माण कराया गया तथा इसी आधार पर सीबीएसई की मान्यता भी प्राप्त की गई। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में रमेश समेत कई अधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं और गांधी परिवार ने भी इसमें सहयोग किया है।
याचिका में तहसील स्तर के कई अधिकारियों के साथ-साथ वर्तमान जिलाधिकारी पर भी आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने सभी आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। न्यायालय ने मामले में पुलिस रिपोर्ट मांगी है। याचिकाकर्ता लाखन सिंह के अनुसार, मामले की सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
सिखों पर बयान से जुड़े मामले में सुनवाई स्थगित
वहीं वाराणसी की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़े मामले की सुनवाई टल गई है। विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में दाखिल रिवीजन याचिका पर अब 19 फरवरी को सुनवाई होगी।
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इसी अदालत में ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान श्रीराम को लेकर कथित टिप्पणी से संबंधित निगरानी याचिका की सुनवाई भी स्थगित कर दी गई है। इन दोनों मामलों में राहुल गांधी को पक्षकार बनाया गया है।
सिखों से जुड़े बयान के मामले में पिछली सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा गया था। यह मामला तिलमापुर सारनाथ निवासी नागेश्वर मिश्र द्वारा दायर किया गया था। इससे पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की गई। सत्र न्यायालय के आदेश पर निचली अदालत ने दोबारा सुनवाई की, लेकिन याचिका पुनः खारिज कर दी गई। इसके बाद वादी ने एक बार फिर निगरानी याचिका दाखिल की है।



