Thursday, March 26, 2026

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लद्दाख में प्रदर्शन तेज, भाजपा कार्यालय को बनाया गया निशाना, कई वाहनों और दस्तावेज़ों में लगाई गई आग

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लद्दाख में चल रहे प्रदर्शन ने मंगलवार को उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय को निशाना बनाया। आक्रोशित युवाओं ने एक सुरक्षा वाहन और कई दस्तावेजों व फर्नीचर को आग के हवाले कर दिया। घटनास्थल पर कई घंटों तक भारी झड़पों और तोड़फोड़ के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किया गया है।

आपको बतादें कि हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी 15 दिन की भूख हड़ताल भी वापस ले ली है। सोनम लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने और छठी अनुसूची के विस्तार समेत तमाम अन्य मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसी समर्थन में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और कई गाड़ियों में भी आग लगा दी।

लद्दाख की राजधानी में बंद के बीच दूर से ही आग की लपटें और काले धुएं के बादल देखे गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है ताकि पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया जा सके।

वांगचुक ने धरना स्थल पर बड़ी संख्या में एकत्रित अपने समर्थकों से कहा, “मैं लद्दाख के युवाओं से हिंसा तुरंत रोकने का अनुरोध करता हूं क्योंकि इससे हमारे उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचता है और स्थिति और बिगड़ती है। लद्दाख और देश में अस्थिरता नहीं चाहते।” हिंसा को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। जैसे-जैसे झड़पें तेज होती गईं, वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया जिसमें युवाओं से शांति बनाए रखने और हिंसा रोकने की अपील की गई।

वर्ष 2019 में अनुच्छेद-370 को खत्म करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दोनों को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था, जिसके बाद अब पूर्ण राज्य की मांग हो रही है। लद्दाख में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत प्रदर्शनकारियों की प्रमुख रूप से कुछ मांगे हैं। इसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग है। साथ ही छठवीं अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा दिए जाने की मांग की गई है | इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि लद्दाख में दो लोकसभा सीटें हों। एक लेह और दूसरी कारगिल। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों की भर्ती को ज्यादा महत्व दिया जाए।

लद्दाख एपेक्स बॉडी की युवा शाखा 10 सितंबर से 35 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे 15 लोगों में से दो की मंगलवार शाम हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।  चार पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम की जनजातीय आबादी के लिए संविधान की छठी अनुसूची शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों के प्रकार, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से प्रयोग की जाने वाली वित्तीय शक्तियों के संबंध में विशेष प्रावधान करती है। लद्दाख में छठी अनुसूची का विस्तार करने का आंदोलन गति पकड़ रहा है। गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों, जिनमें एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सदस्य शामिल हैं|

दोनों संगठन पिछले चार वर्षों से अपनी मांगों के समर्थन में संयुक्त रूप से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और अतीत में सरकार के साथ कई दौर की वार्ता कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर लेह शहर बंद हो गया और एनडीएस स्मारक मैदान में बड़ी भीड़ जमा हो गई और बाद में छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य के समर्थन में नारे लगाते हुए शहर की सड़कों पर मार्च निकाला। स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ युवाओं ने भाजपा और हिल काउंसिल के मुख्यालय पर पथराव किया। अधिकारियों ने कहा कि शहर भर में बड़ी संख्या में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए ।

युवाओं के समूहों ने एक सुरक्षा वाहन और कुछ और को आग लगा दी गई इतना ही नहीं भाजपा कार्यालय को भी निशाना बनाया। उन्होंने परिसर और एक इमारत के अंदर फर्नीचर और कागजों में आग लगा दी। स्थिति पर नजर रख रहे अधिकारियों ने बताया कि कई घंटों की भीषण झड़प के बाद घटनास्थल पर अतिरिक्त बल भेजा गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।

आपको बतादें कि लगभग चार महीने तक रुकी रही वार्ता के बाद, 20 सितंबर को केंद्र ने एलएबी और केडीए को वार्ता के लिए आमंत्रित किया मंगलवार को त्सेरिंग अंगचुक (72) और ताशी डोल्मा (60) की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद तनाव बढ़ गया। इससे एलएबी के घटकों में चिंता फैल गई और उन्होंने केंद्र से बातचीत को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। पूर्व सांसद और एलएबी अध्यक्ष थुपस्तान छेवांग, जिन्होंने 27 मई को अंतिम दौर की वार्ता के बाद निकाय से इस्तीफा दे दिया था, वापस अध्यक्ष पद पर आसीन हो गए हैं और वार्ता के दौरान संयुक्त प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की संभावना है।

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