Saturday, February 14, 2026

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किसानों की समृद्धि के बिना नहीं आ सकती खुशहालीः योगी

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। किसान की समृद्धि के बिना खुशहाली नहीं आ सकती। भारत में कृषि व पशुधन एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। अन्नदाता किसान के घर में पशुधन होगा और पशुपालक भी खेतीबाड़ी से अवश्य जुड़ा होगा। इनके आपसी संबंध को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्ष में किसानों की खुशहाली व समृद्धि के लिए बढ़ाए गए कदम अत्यंत महत्वपूर्ण व सराहनीय हैं। पीएम मोदी की प्रेरणा से यूपी में भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए गए हैं। डबल इंजन सरकार की ऊर्जा का लाभ यूपी ने लिया है। यूपी दुग्ध उत्पादन में देश में नंबर एक पर है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘भारत में पशु नस्लों का विकास’ कार्यशाला का शुभारंभ किया। सीएम ने गोरखपुर के कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान तथा पशुपालन अवसंरचना विकास निधि के तहत यूपी में तीन प्रोजेक्ट (अमेठी, बरेली व मथुरा) का बटन दबाकर उद्घाटन किया। अतिथियों ने पुस्तिका का भी विमोचन किया।

पशुधन को एफएमडी मुक्त बनाकर पशुपालकों के जीवन में खुशहाली लाने में देंगे योगदान
सीएम योगी ने एफएमडी बीमारी (खुरपका-मुंहपका) की चुनौतियों का जिक्र किया। बोले कि एफएमडी के वैक्सीनेशन कार्यक्रम प्रारंभ हुए, फिर बीच में उसे रोका गया, लेकिन केंद्रीय मंत्री ने सेचुरेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आज आश्वासन दिया है। सीएम ने आश्वस्त किया कि पशुधन को एफएमडी मुक्त बनाकर पशुपालकों के जीवन में खुशहाली लाने में योगदान देंगे।

ध्यान देंगे तो पशुपालकों को दे सकते हैं स्थायी समृद्ध निधि
सीएम योगी ने कहा कि पशुधन का असर वहां के क्लाइमेटिक जोन, उसके पालन, रखरखाव, नस्ल पर भी प्रभाव पड़ता है। यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग गोवंश दिखेंगे। स्थानीय स्तर पर देसी पद्धतियों से जिन्होंने नस्ल को सुधारने के लिए प्रयास किए, उन्होंने अच्छी नस्ल को बढ़ाने में सफलता प्राप्त कर ली। जो लोग प्रयास नहीं कर पाए, वहां पशुधन काफी पिछड़ा हुआ था। आज के समय में बहुत सारी स्थानीय नस्लें लुप्तप्राय की ओर हैं। उन पर ध्यान देंगे तो पशुपालकों को स्थायी समृद्ध निधि दे सकते हैं।

यूपी में कार्यरत हैं पांच मिल्क प्रोड्यूसर
भारत सरकार का धन्यवाद देते हुए सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने यूपी में मिल्क प्रोड्यूसर को प्रोत्साहित किया है। झांसी के बलिनी, गोरखपुर, आगरा, काशी समेत यूपी में पांच मिल्क प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। इससे लाखों महिलाएं जुड़ी हैं, जो समितियों के माध्यम से दुग्ध कलेक्शन, आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करती हैं और पशुपालन की अच्छी नस्ल की भी चिंता करती हैं। दुग्ध कलेक्शन के माध्यम से वैल्यू एडिशन से किसानों व पशुपालकों के जीवन में खुशहाली लाने में योगदान दे सकते हैं। सीएम ने कहा कि गोरखपुर और काशी से जुड़े किसानों ने अपनी सफलता की कहानी सुनाई, जो सफलता की नई ऊंचाई की तरफ हम सभी को प्रेरित करती हैं।

2017 में हम लोगों के सामने थी बड़ी चुनौती
सीएम योगी ने कहाकि 2017 में हम लोगों के सामने बहुत चुनौती थी। समय के अनुरूप पशुधन की नस्लों में सुधार नहीं हुए, जिसके परिणाम स्वरूप बड़े पैमाने पर पशुधन सड़कों, खेतों, कसाईखानों में जाते थे। आस्था से खिलवाड़, किसानों के खेत में परेशानी और सड़कों पर दुर्घटनाएं भी होती थीं। 2017 में निराश्रित गोआश्रय स्थल की कार्ययोजना बनाई और 2018 में उसे लागू किया।

14 लाख से अधिक गोवंश की हो रही देखभाल
सीएम योगी ने कहा कि आज 14 लाख से अधिक गोवंशों की देखभाल सरकार की गोशालाओं या सरकार द्वारा सहायता प्राप्त पशुपालकों द्वारा की जा रही है। सीएम ने तीन स्कीम का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार 12 लाख गोवंशों की देखभाल अपने निराश्रित गोआश्रय स्थल के माध्यम से करती है। दूसरी स्कीम-सहभागिता योजना के माध्यम से चालू की गई है। हम किसी भी पशुपालक को चार गोवंश तक देते हैं। उसकी देखभाल के लिए हर महीने 1500 रुपये प्रति गोवंश देते हैं। इसमें लगभग दो लाख से अधिक पशुधन 1.25 लाख किसानों के पास है। तीसरी स्कीम-कुपोषित परिवारों को निराश्रित गोआश्रय स्थल से बियाई हुई गाय देते हैं। 10 हजार से अधिक परिवारों को एक-एक गाय दे रखी है। 1500 रुपये हर महीने रुपये गाय की सेवा के लिए उपलब्ध कराते हैं। इससे गोवंश के संरक्षण व संवर्धन को बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

सीएम ने गोसेवा आयोग के कार्यों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में गोसेवा आयोग को जिम्मेदारी दी है कि निराश्रित गोआश्रय स्थल की व्यवस्था ठीक हो, नस्ल सुधार के लिए अभियान चले और वे सुनिश्चित करें कि गोवंश के नस्ल सुधार कार्यक्रम को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को प्रशिक्षित भी कर सकें। निराश्रित गोआश्रय स्थलों को नेचुरल फॉर्मिंग से भी जोड़ सकें।

सीएम ने बीमारियों को लेकर जताई चिंता
सीएम ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में केमिकल, पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर का अत्यधिक उपयोग नई बीमाारियों को जन्म दे रहा है। कैंसर, खराब किडनी, लीवर के दुष्परिणाम बताते हैं कि केमिकल, पेस्टिसाइड व फर्टिलाइजर का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया है। हमें इस समस्या के समाधान का रास्ता निकालना होगा। प्राकृतिक जीवन जीने के लिए प्राकृतिक खेती महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक खेती गो आधारित खेती ही है, भारतीय नस्ल का गोवंश उसमें बड़ी भूमिका का निर्वहन कर सकता है।

नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से देवनदी गंगा को पीएम मोदी ने दिया नया जीवनदान
सीएम योगी ने कहा कि यूपी के 27 जनपद मां गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित हैं। पीएम मोदी ने नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से देवनदी गंगा को नया जीवनदान दिया है। गंगा की धारा अवरिल व निर्मल हुई तो 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज महाकुम्भ आए। यदि गंगा स्वच्छ व अविरल नहीं होती तो यह संभव नहीं हो पाता। पीएम मोदी ने एक तरफ इस कार्यक्रम को भगीरथ प्रयास के रूप में बढ़ाया, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान स्वरूप उन्हें जो 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे, उन्होंने पूरी राशि नमामि गंगे परियोजना को दी। इससे अविरल व निर्मल देवनदी गंगा को पुनर्जीवित किया गया। सीएम ने कहा कि खेतों में जो केमिकल, पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर डालते हैं, वह बरसात में बहकर नदियों में जाता है और जल को दूषित करता है। उस जल के सेवन का दुष्परिणाम कैंसर, किडनी व लीवर फेल्योर के रूप में मिल रहा है। प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाना ही इसका समाधान है।

27 जनपदों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का विशेष अभियान चलाया
सीएम ने कहा कि 27 जनपदों में हम लोगों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का विशेष अभियान चलाया है। बुंदेलखंड के सातों जनपदों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रहे हैं। गो आधारित खेती के महत्व को बढ़ाने की दिशा में प्रयास प्रारंभ हुए हैं। यह किसानों की आमदनी को बढ़ाने में योगदान देंगे। किसान की आमदनी-समृद्धि बढ़ेगी तो देश समृद्धि के नए सोपान को प्राप्त करेगा। आत्मनिर्भर व विकसित भारत के संकल्पों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

पशुपालकों को अच्छा चारा उपलब्ध कराने में मदद करेंगे अंबेडकर नगर के चारा उत्पादन केंद्र
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में इस दिशा में और भी प्रयास हुए हैं। लैंड लॉक्ड स्टेट में यूपी मत्स्य उत्पादन में अग्रणी राज्यों में है। दस वर्ष पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अंडा उत्पादन, कुक्कुट पालन में यूपी ने अच्छी छलांग लगाई है। एनडीडीबी ने यूपी सरकार के साथ मिलकर एमओयू साइन किया है और तीन डेयरी (गोरखपुर, कानपुर, कन्नौज) को लिया है। अंबेडकर नगर के चारा उत्पादन केंद्र को भी एनडीडीबी को दिया गया है। इससे पशुपालकों को अच्छा चारा उपलब्ध कराने में वे मदद करेंगे।

कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन सिंह’, अरुणाचल प्रदेश के पशुपालन मंत्री गेब्रियल डी वांगसु, प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह, गोसेवा आयोग के अध्य़क्ष श्याम बिहारी गुप्ता, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष, भारत सरकार की सचिव (पशुपालन व डेयरी) अलका उपाध्याय आदि की मौजूदगी रही।किसानों ने रखे अपने अनुभव
किसान रामप्रकाश दुबे (वाराणसी), विनीता देवी (वाराणसी), लखपति दीदी कौशल्या देवी (गोरखपुर), सोनम कुमारी (एटा), पन्नेलाल यादव (गोरखपुर) ने सफलता की कहानी और सरकार से मिले सहयोग की कहानी साझा की।

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