न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले की जांच ने तेजी पकड़ ली है। झूंसी थाने में दर्ज इस हाई-प्रोफाइल केस में मंगलवार को पुलिस ने एक नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया, जबकि दूसरे नाबालिग के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
जांच टीम ने माघ मेला क्षेत्र में बताए गए घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित शिविरों की स्थिति, वहां की आवाजाही और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच की। सूत्रों के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट, पूर्व में दर्ज बयानों, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित घटना के समय संबंधित लोग कहां मौजूद थे।
इस मामले में अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो नाबालिगों को पेश किया था, जिसके बाद पॉक्सो की विशेष अदालत के निर्देश पर मुकदमा कायम किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और साधु-संतों से पूछताछ की तैयारी
पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जुटाने की तैयारी में है। जांच दल ने उस शिविर क्षेत्र का नक्शा तैयार किया है जहां कथित अनुष्ठान होने की बात सामने आई है। आसपास के शिविर संचालकों, सुरक्षाकर्मियों और नियमित रूप से आने-जाने वाले साधु-संतों से पूछताछ की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित अवधि में नाबालिगों की मौजूदगी वहां देखी गई थी या नहीं, और क्या किसी को किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी थी। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच उच्चाधिकारियों की देखरेख में चल रही है। अगले चरण में आरोपित पक्ष से भी विस्तृत पूछताछ की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और शिकायतकर्ता की कथित तस्वीर साझा करते हुए जांच पर सवाल उठाए हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल फोटो की सत्यता और संदर्भ की भी जांच की जा रही है तथा इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित नहीं होगी।



