Tuesday, March 24, 2026

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संसद में बताएंगे PM मोदी,ईरान में जंग से गैस और तेल की कितनी किल्लत, क्या कर रही सरकार

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ईरान में जारी जंग के चलते पैदा हुए हालातों के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को जानकारी देंगे| पीएम नरेंद्र मोदी आज संसद में देश को संबोधित करते हुए ईरान में जारी संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले असर की जानकारी देंगे। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री लोकसभा में दोपहर 2 बजे इस मुद्दे पर विस्तार से बोलेंगे और खासतौर पर देश में तेल और गैस की सप्लाई की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री अपने संबोधन में यह बताएंगे कि मौजूदा वैश्विक हालात के बीच भारत में ईंधन आपूर्ति कितनी प्रभावित हुई है और अगर किसी तरह की कमी की आशंका है तो उससे निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

पीएमओ में हुई हाई-लेवल बैठक

रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों से विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान पेट्रोलियम, ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, शिपिंग, वित्त और सप्लाई से जुड़े विभागों ने अपनी-अपनी तैयारियों और रणनीतियों का प्रेजेंटेशन दिया।

बैठक में यह भी समीक्षा की गई कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हालातों के बीच भारत ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे की रणनीति क्या होगी।

खरीफ सीजन को लेकर सरकार सतर्क

आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। हाल के दिनों में फर्टिलाइजर की कमी की खबरों को देखते हुए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

बिजली और कोयला सप्लाई पर भी फोकस

बैठक में बिजली आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। सरकार ने सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बिजली उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

LPG और वैकल्पिक ऊर्जा पर नजर

एलपीजी की संभावित कमी के चलते लोगों का रुझान इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली की निर्बाध सप्लाई बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल, फार्मा और केमिकल सेक्टर में कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

वैश्विक असर, लेकिन भारत तैयार

प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि मौजूदा संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, लेकिन भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समन्वय के साथ काम करना होगा।

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