न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने अलग अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। आजमगढ़ जिले के अतरौलिया क्षेत्र के खजुरी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजभर ने राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना का दायरा बढ़ाते हुए ढाई हजार से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ा। इस मौके पर युवाओं को प्रतीकात्मक रूप से पीली वर्दी और पीला डंडा भी सौंपा गया, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पीले रंग में रंगा प्रशिक्षण शिविर
खजुरी गांव में आयोजित प्रशिक्षण शिविर का माहौल किसी कैंप जैसा नजर आया, जहां हर ओर पीला रंग छाया हुआ था। कार्यक्रम के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने स्वयं युवाओं को पारंपरिक प्रशिक्षण साधन के रूप में डंडा दिया। उन्होंने कहा कि यह शक्ति, अनुशासन और एकता का प्रतीक है। राजभर के मुताबिक, राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना का उद्देश्य युवाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में अनुशासित व जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है।
“डंडा हथियार नहीं, प्रशिक्षण का माध्यम”
पीली वर्दी और डंडा बांटे जाने पर उठे सवालों पर राजभर ने साफ कहा कि इसे हथियार के रूप में देखना गलत है। उन्होंने कहा कि यह अवैध हथियार नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण का हिस्सा है। राजभर ने तर्क दिया कि लाठी-डंडा भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है और आत्मरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए इसे नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
पूर्वांचल में सियासी मजबूती की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘पीली सेना’ के जरिए ओम प्रकाश राजभर पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। एक समान वर्दी और प्रशिक्षण के जरिए संगठन को मजबूत संदेश देने की रणनीति अपनाई गई है।
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मंच से राजभर ने कहा कि यह सेना किसी के विरोध के लिए नहीं, बल्कि गरीब, वंचित और शोषित वर्ग की आवाज बनने के लिए तैयार की जा रही है। उन्होंने युवाओं से गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों और महाराजा सुहेलदेव के विचारों को लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका
इस आयोजन के बाद विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या किसी मंत्री द्वारा इस तरह डंडा बांटना शांति व्यवस्था के लिहाज से सही है। हालांकि, राजभर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह संगठनात्मक गतिविधि बताया है। अब देखना होगा कि यह ‘पीला अभियान’ आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस तरह की हलचल पैदा करता है।



