Saturday, March 7, 2026

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राज्यसभा की चर्चा में पहले था निशांत का नाम, फिर कैसे तय हुआ नीतीश कुमार का जाना? जानिए पूरी कहानी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। करीब दो दशक तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब सक्रिय राजनीति के इस अध्याय को समेटते हुए राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। पहली नजर में यह फैसला अचानक लग सकता है, लेकिन राजनीतिक गलियारों से मिली जानकारी बताती है कि इसकी तैयारी पिछले एक महीने से चुपचाप चल रही थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को राजनीति में सक्रिय करने की चर्चा तेज हुई। अब तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाले निशांत हाल के दिनों में जेडीयू के कई कार्यक्रमों में दिखाई दिए थे। पार्टी के अंदर एक वर्ग उन्हें नीतीश कुमार के बाद संगठन को संभालने वाले चेहरे के रूप में देख रहा था।

शुरुआती योजना यह बताई जा रही थी कि निशांत को राज्यसभा भेजकर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का अनुभव दिलाया जाए। लेकिन इसी दौरान बीजेपी के रणनीतिकारों, खासकर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, ने इस स्थिति को अलग नजरिए से देखा। उनका मानना था कि नीतीश कुमार की सेहत को देखते हुए उन्हें सम्मानजनक तरीके से सक्रिय राजनीति से विदाई देने का यह सही समय हो सकता है।

दरअसल, अक्टूबर 2025 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थीं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बीजेपी नेतृत्व को लगा कि मौजूदा समय में यह बदलाव कराना ज्यादा आसान होगा। उन्हें आशंका थी कि अगर ज्यादा इंतजार किया गया तो जेडीयू संगठनात्मक रूप से फिर मजबूत हो सकती है, जिससे सत्ता में बदलाव करना कठिन हो जाएगा।

इस रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए अमित शाह ने जेडीयू के कई वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा। इनमें Rajiv Ranjan Singh, Sanjay Jha और Vijay Kumar Chaudhary शामिल थे। बताया जाता है कि विजय कुमार चौधरी ने ही अंततः नीतीश कुमार के सामने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव रखा।

फरवरी के अंतिम सप्ताह से इन नेताओं की मुख्यमंत्री के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। बीजेपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि अगर नीतीश कुमार अभी राज्यसभा नहीं जाते हैं, तो अगला मौका करीब दो साल बाद ही मिल सकता है।

बताया जाता है कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नीतीश कुमार के परिवार को 3 मार्च को मिली। हालांकि तब तक राजनीतिक फैसला लगभग तय हो चुका था। 4 मार्च को जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री Bijendra Prasad Yadav ने उनसे मुलाकात कर फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया, लेकिन तब तक नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी और नीतीश कुमार दस्तखत कर चुके थे।

समझौते के तहत अब निशांत कुमार दिल्ली की बजाय बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका से अपना राजनीतिक सफर शुरू करेंगे। वहीं नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है। कभी “सुशासन बाबू” के नाम से पहचान बनाने वाले इस नेता ने आखिरकार अपने स्वास्थ्य और बेटे के राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पद को अलविदा कह दिया।

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