न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- देश की सबसे बड़ी अदालत में केस लड़ना आसान नहीं होता, खासकर तब जब सामने वरिष्ठ वकीलों की लंबी फौज हो और मामला संवेदनशील हो। लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने हिम्मत और आत्मविश्वास की मिसाल पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी पैरवी की और आखिरकार जीत हासिल की।
मामला NEET परीक्षा और EWS आरक्षण से जुड़ा है। अथर्व ने NEET 2024–25 परीक्षा में 720 में से 530 अंक हासिल किए थे। इसके बाद NEET 2025–26 में उन्होंने 164वीं EWS रैंक प्राप्त की। बावजूद इसके, मध्य प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण लागू न होने के कारण उन्हें एडमिशन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
अपने अधिकार के लिए अथर्व ने ऑनलाइन याचिका दायर कर Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया। 10 फरवरी को उनका मामला मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। अदालत की कार्यवाही समाप्त होने ही वाली थी, तभी अथर्व ने साहस जुटाकर कहा, “माई लॉर्ड्स, मुझे सिर्फ 10 मिनट दीजिए।”
बताया जाता है कि उन्होंने अदालत के समक्ष संविधान के 103वें संशोधन के तहत अनुच्छेद 15(6) और 16(6) का हवाला दिया, जिनमें निजी और गैर-अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत EWS आरक्षण का प्रावधान है। अथर्व ने तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व न्यायिक निर्देशों का पालन न करने के कारण उन्हें अनुचित रूप से प्रवेश से वंचित किया गया।
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि छात्र को उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि एक निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में अथर्व का दाखिला सुनिश्चित किया जाए।
मीडिया से बातचीत में अथर्व ने कहा कि शुरुआत में वे घबराए हुए थे, लेकिन उन्हें भरोसा था कि कानून उनके पक्ष में है। उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ नियमों और संविधान का सहारा लिया।”
अथर्व चतुर्वेदी की यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे युवा हौसले और संवैधानिक अधिकारों की जीत के रूप में देख रहे हैं।



