न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले 14 अगस्त को जब देश ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया, उसके दो दिन बाद NCERT ने 16 अगस्त को भारत-पाकिस्तान विभाजन पर आधारित एक नया शैक्षिक मॉड्यूल जारी किया। इस मॉड्यूल के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
NCERT ने पहली बार अपने आधिकारिक शिक्षण सामग्री में मुहम्मद अली जिन्ना के साथ-साथ कांग्रेस नेतृत्व और लॉर्ड माउंटबेटन को भी विभाजन का ज़िम्मेदार ठहराया है। अब तक पाठ्यपुस्तकों में विभाजन के लिए मुख्य रूप से जिन्ना को दोषी माना जाता रहा है।
क्या कहा गया है नए मॉड्यूल में?
द्वितीयक स्तर के लिए तैयार किए गए मॉड्यूल में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है: “भारत का विभाजन और पाकिस्तान का निर्माण किसी भी तरह से अपरिहार्य नहीं था।”
इसमें तीन प्रमुख पक्षों को ज़िम्मेदार बताया गया है:
- जिन्ना, जिन्होंने विभाजन की माँग की
- कांग्रेस, जिसने इसे स्वीकार किया
- माउंटबेटन, जिन्होंने इसे औपचारिक रूप दिया और लागू किया
कांग्रेस ने विभाजन की योजना को स्वीकार किया – NCERT

मॉड्यूल के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने विभाजन की योजनाओं को स्वीकृति दी, साथ ही जिन्ना की रणनीति को कम करके आंका, और उसके बाद होने वाली दीर्घकालिक मानवीय त्रासदी का सही पूर्वानुमान नहीं लगा सके।
इसके अलावा, इसमें कहा गया है कि:“किसी भी भारतीय नेता को प्रशासन, सेना या पुलिस चलाने का अनुभव नहीं था।” इसी अनुभवहीनता के चलते विभाजन जैसे अहम निर्णयों में जल्दबाज़ी की गई।
इस नए मॉड्यूल में विभाजन को “एक अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें उल्लेख किया गया:
- लगभग 5 करोड़ लोग विस्थापित हुए
- सामूहिक हत्याएं, यौन हिंसा और
- शरणार्थियों की ट्रेनें केवल लाशों से भरी हुई होती थीं
इस मॉड्यूल के सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी है। उनका मानना है कि यह इतिहास को राजनीतिक नजरिए से पुनर्लेखन करने की कोशिश है। आने वाले दिनों में इस पर संसद और शैक्षणिक हलकों में तीखी बहस की संभावना है।



