न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में गुरुवार को एक अवैध कोयला खदान में हुए भीषण डायनामाइट विस्फोट ने बड़ा हादसा कर दिया। इस दुर्घटना में अब तक कम से कम 18 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन को डर है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
यह हादसा जिले के सुदूरवर्ती मयन्संगट-थांगस्को क्षेत्र में हुआ, जहां लंबे समय से अवैध रूप से कोयला खनन किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। विस्फोट की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), अग्निशमन सेवा, फॉरेंसिक टीम और बम निरोधक दस्ता तुरंत रवाना किया गया।
ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हादसा डायनामाइट विस्फोट के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि एक गंभीर रूप से झुलसे घायल को बेहतर इलाज के लिए शिलांग रेफर किया गया है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन क्षेत्र दुर्गम होने के कारण ऑपरेशन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ी ढहने से दबे मजदूर
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, जिस पहाड़ी पर अवैध खनन किया जा रहा था, वहीं विस्फोट हुआ। धमाके के बाद पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। घटनास्थल पर चारों तरफ कोयले, पत्थरों और मिट्टी का ढेर फैल गया है, जिससे बचाव कार्य और जटिल हो गया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि खदान में काम करने वाले अधिकतर मजदूर बाहरी राज्यों से थे और सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी नहीं थे। अवैध खनन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनती रही है।
पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा
यह पहली बार नहीं है जब थांगस्को क्षेत्र में इस तरह का हादसा हुआ हो। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी इसी इलाके में एक विस्फोट हुआ था, जिसमें दो खनिकों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद अवैध खनन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी।
रैट-होल माइनिंग पर प्रतिबंध के बावजूद जारी अवैध खनन
गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अप्रैल 2014 में मेघालय में खतरनाक और अवैज्ञानिक ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध पर्यावरण और मानव जीवन को होने वाले गंभीर खतरे को देखते हुए लगाया गया था।
मेघालय हाई कोर्ट द्वारा कोयला मामलों की निगरानी के लिए नियुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद काटाके भी पहले यह कह चुके हैं कि सरकार के आश्वासनों के बावजूद राज्य में अवैध कोयला खनन और उसका परिवहन लगातार जारी है।
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हालांकि, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने पूर्व में दावा किया था कि जिला प्रशासन सतर्क है और अवैध खनन से जुड़े 1,000 से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है, लेकिन ताजा हादसा प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े करता है।
जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
प्रशासन ने इस हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन में शामिल लोगों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल राहत और बचाव कार्य प्राथमिकता पर है और मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिशें जारी हैं।



