Wednesday, March 4, 2026

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महाराष्ट्र राज्यसभा सीट पर तकरार, ठाकरे से की पीछे हटने की गुहार; 1 सीट पर मची रार

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महाराष्ट्र की एकमात्र जीतने योग्य राज्यसभा सीट को लेकर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष के पास केवल एक सीट जीतने की स्थिति है और उस पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) दोनों ने दावा ठोक दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से इस सीट पर दावा छोड़ने का अनुरोध किया है। हालांकि इस पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

क्यों अहम है यह सीट?

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास है। नियमों के अनुसार, किसी भी दल को नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए कुल सदस्य संख्या का 10 प्रतिशत या कम से कम 25 सांसदों का समर्थन चाहिए।

मौजूदा समय में कांग्रेस के पास 27 सदस्य हैं, लेकिन कुछ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में एक भी सीट का नुकसान पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

ठाकरे से क्या कहा गया?

रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बातचीत की। कांग्रेस ने प्रस्ताव रखा है कि राज्यसभा सीट उसे दी जाए और बदले में शिवसेना (यूबीटी) को विधान परिषद (एमएलसी) की सीट का समर्थन दिया जाएगा।

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च है, जबकि मतदान 16 मार्च को होना है।

किन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा?

अप्रैल में कई प्रमुख नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास आठवले, भागवत कराड और रजनी पाटिल शामिल हैं।

सत्तारूढ़ महायुति के पास बहुमत होने के कारण विपक्षी गठबंधन केवल एक सीट जीतने की स्थिति में है।

एमवीए में किसकी कितनी ताकत?

एमवीए के भीतर संख्या बल को देखें तो शिवसेना (यूबीटी) के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायकों का समर्थन है।

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इधर, आदित्य ठाकरे ने कहा है कि वार्ता जारी है और रोटेशन नीति के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) का दावा मजबूत है। वहीं कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी सीट पर अपना दावा बरकरार रखने की बात कही है।

क्या बनेगा समझौता?

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि यह मुद्दा टकराव में न बदले। यदि समझौता नहीं हुआ तो विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ सकता है।

अब निगाहें 5 मार्च की नामांकन अंतिम तिथि और 16 मार्च को होने वाले चुनाव पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि एमवीए के भीतर यह रार सुलझती है या और गहराती है।

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