Thursday, March 26, 2026

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‘क्या पुरुष भी हो सकते हैं गर्भवती?’ अमेरिकी सीनेट में डॉक्टर से सवाल, जवाब पर छिड़ी वैश्विक बहस

वॉशिंगटन। क्या पुरुष भी महिलाओं की तरह गर्भवती हो सकते हैं? आमतौर पर इस सवाल का जवाब सीधा “नहीं” माना जाता है, लेकिन अमेरिका की सीनेट में जब यही सवाल एक चर्चित गायनोलॉजिस्ट से पूछा गया, तो उनका जवाब सुनकर हर कोई चौंक गया। अब यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट में गर्भपात से जुड़े एक मामले की सुनवाई चल रही थी। सुनवाई का मुख्य विषय गर्भपात की दवाओं की सुरक्षा था। इसी दौरान भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर और गायनोलॉजिस्ट डॉ. निशा वर्मा को गवाही देने के लिए बुलाया गया।

गर्भपात की दवाओं पर गवाही

सीनेट में अपनी गवाही के दौरान डॉ. वर्मा ने कहा कि गर्भपात की दवाओं पर कई वर्षों से व्यापक शोध किया जा रहा है और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर इन्हें सुरक्षित माना गया है।

सीनेटर का सीधा सवाल

सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉले ने डॉ. वर्मा से अचानक एक सीधा सवाल पूछ लिया—“क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?”
इस सवाल के बाद सुनवाई कक्ष का माहौल गंभीर हो गया।

डॉ. वर्मा ने इस सवाल का सीधा “हां” या “नहीं” में जवाब देने के बजाय कहा कि वह विभिन्न लैंगिक पहचान वाले लोगों का इलाज करती हैं और इस विषय को केवल पारंपरिक परिभाषाओं में सीमित नहीं किया जा सकता।

‘हां या ना में जवाब दीजिए’

सीनेटर हॉले इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि विज्ञान और जैविक सच्चाई से जुड़ा सवाल है। उन्होंने बार-बार जोर देकर पूछा कि क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं या नहीं।

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इसके जवाब में डॉ. वर्मा ने कहा कि ऐसे प्रश्न जटिल होते हैं और उन्हें केवल हां या ना में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने मरीजों के अनुभवों को समझते हुए ध्रुवीकरण वाली भाषा से बचना चाहती हैं।

बहस हुई तीखी

इस पर सीनेटर हॉले ने कहा कि जैविक रूप से गर्भ धारण केवल महिलाएं ही कर सकती हैं, पुरुष नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. वर्मा एक बुनियादी वैज्ञानिक तथ्य को स्वीकार नहीं कर रहीं, जिससे एक वैज्ञानिक के रूप में उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

अंत में बहस काफी तीखी हो गई। हॉले ने कहा कि महिलाओं को एक जैविक सच्चाई के रूप में पहचानना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। वहीं डॉ. वर्मा का कहना था कि वह विज्ञान के साथ-साथ मरीजों की जटिल सामाजिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी समझने की कोशिश करती हैं।

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