Thursday, March 26, 2026

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कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने से डरी उन्नाव रेप पीड़िता, बोली- अब जान का खतरा बढ़ गया है

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्नाव रेप कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। फैसले के बाद पीड़िता और उसका परिवार गहरे डर में है। पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि जमानत के बाद उनके लिए हालात और भी खतरनाक हो गए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता ने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से फोन पर बातचीत में अपनी आशंका जताई। रोती हुई आवाज में उसने कहा, “आज जमानत मिली है, कल घर छीन लिया जाएगा और फिर हमें मार दिया जाएगा।” उसने बताया कि फैसले के वक्त वह अपनी मां के साथ कोर्ट में मौजूद थी और विरोध भी किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

पीड़िता का कहना है कि पहले परिवार, पैरोकार और गवाहों की सुरक्षा हटाई गई और अब यह फैसला उनके लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। उसने कहा कि कई बार आत्महत्या का विचार आता है, लेकिन बच्चों की जिम्मेदारी उसे रोक देती है। “मैं मर गई तो बच्चों का क्या होगा,” उसने कहा।

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पीड़िता ने बताया कि उसने वर्ष 2023 में आजमगढ़ के एक युवक से छिपकर शादी की थी और फिलहाल दिल्ली में पति के साथ रह रही है। उसके दो छोटे बच्चे हैं और दिव्यांग सास भी साथ रहती हैं। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। उसका कहना है कि कुलदीप सेंगर के जेल से बाहर आने पर सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा, यहां तक कि सुरक्षा के लिए जेल में शरण लेने की नौबत आ सकती है।

मार्च में हटाई गई थी सीआरपीएफ सुरक्षा

उन्नाव रेप कांड में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पीड़िता, उसके परिजनों, गवाहों और वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा दी गई थी। केंद्र सरकार ने 2019 में यह कहते हुए सुरक्षा हटाने की मांग की थी कि मामले में दोष सिद्ध हो चुका है। इसी आधार पर इस साल मार्च में सीआरपीएफ सुरक्षा हटाने का फैसला लिया गया।

दिल्ली में धरने से हटाई गईं महिलाएं

हाईकोर्ट के फैसले के बाद महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने मंगलवार रात इंडिया गेट पर धरना दिया। हालांकि, कर्तव्य पथ पुलिस ने उन्हें और दो अन्य महिलाओं को जबरन वहां से हटा दिया। बाद में थाने ले जाकर छोड़ दिया गया।

पुरानी रंजिश से शुरू हुई थी त्रासदी

बताया जाता है कि प्रधानी चुनाव के दौरान शुरू हुई रंजिश ने पीड़िता के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। गांव में दोनों परिवारों के बीच वर्षों से चली आ रही दुश्मनी हिंसा में बदली, जिसमें पीड़िता ने अपने परिवार के चार सदस्यों को खो दिया। डर और दबाव के चलते आज हालत यह है कि रिश्तेदार भी साथ देने से कतराते हैं।

पुलिसकर्मियों पर भी हुई कार्रवाई

पीड़िता के पिता की जेल में हुई मौत के मामले में तत्कालीन माखी थाने के एसओ और एक दरोगा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जांच के बाद थाने के छह पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था।

कुल मिलाकर, जमानत के फैसले ने एक बार फिर पीड़िता की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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