न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के एक रहस्यमय सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी थी। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा था कि दुनिया में सबसे बड़ी ताकत अपनी बात रखने की क्षमता है।
उनके इस बयान पर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी तीखा जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- “शब्द तभी शक्ति बनते हैं, जब वे लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाएँ।”
उन्होंने आगे कहा कि जनता ने उन्हें सिर्फ कुछ पलों के लिए नहीं, बल्कि पूरे 5 साल के जनादेश के साथ जिम्मेदारी सौंपी है।
सिद्धारमैया ने सरकारी योजनाओं का किया उल्लेख
CM सिद्धारमैया ने अपनी पोस्ट में सरकार की गारंटी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी टीम ने सत्ता संभालते ही वादों को धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया।
A Word is not power unless it betters the World for the people.
Proud to declare that the Shakti scheme has delivered over 600 crore free trips to the women of our state. From the very first month of forming the government, we transformed our guarantees into action; not in… pic.twitter.com/lke1J7MnbD
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) November 27, 2025
उन्होंने शक्ति, गृह लक्ष्मी, युवा निधि जैसी प्रमुख योजनाओं को इस बात का उदाहरण बताया कि उनकी सरकार केवल बातों पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई पर विश्वास करती है।
“हमारी प्रतिबद्धता नारेबाजी नहीं” — सिद्धारमैया
सिद्धारमैया ने लिखा- “कर्नाटक की जनता का मैंडेट एक क्षणिक निर्णय नहीं, बल्कि 5 साल की पूरी जिम्मेदारी है। कांग्रेस अपनी करुणा, निरंतरता और साहस के साथ लोगों के लिए काम कर रही है।”
शिवकुमार का पोस्ट क्या कहता है?
इससे पहले उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने लिखा था- “शब्दों का प्रभाव सबसे बड़ा होता है… दुनिया में अपनी बात रखने से बड़ी शक्ति कोई नहीं, भले वह जज हो, प्रेसिडेंट हो या मैं ही क्यों न हूँ।”
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राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उनका यह संदेश सत्ता साझेदारी को लेकर चल रही असंतोष की ओर संकेत देता है।
पावर शेयरिंग फार्मूले पर बढ़ रही दरार
कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार की जंग अब खुलकर सामने आने लगी है। बताया जाता है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल का पावर-शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ था।
लेकिन अब हालात ऐसे दिख रहे हैं कि सिद्धारमैया पद छोड़ने को इच्छुक नहीं हैं, जबकि शिवकुमार का गुट उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहा है। पार्टी के लिए यह अंदरूनी टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।



