न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड, कोलंबिया, नाइजीरिया और ईरान समेत कई देशों को खुली चेतावनी दी है। ट्रंप की इन धमकियों के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञ जेफ्री सैक्स ने अमेरिका की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जेफ्री सैक्स ने आशंका जताई है कि ईरान अमेरिका का अगला सैन्य टारगेट हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो हालात वेनेजुएला से कहीं ज्यादा भयावह होंगे।
अमेरिका में कानून सिर्फ एक कल्पना बन गया: सैक्स
इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में जेफ्री सैक्स ने कहा कि अमेरिका में अब कानून सिर्फ एक काल्पनिक कहानी बनकर रह गया है। उनके मुताबिक, देश एक ऐसे डीप स्टेट सैन्य तंत्र के प्रभाव में काम कर रहा है, जो संविधान से ऊपर खुद को मानता है।
उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अब नियंत्रण में नहीं हैं और अमेरिकी सत्ता संरचना लोकतांत्रिक सीमाओं से बाहर जाकर फैसले ले रही है।
ईरान पर हमला हुआ तो हालात होंगे बेहद खतरनाक
ईरान पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर सैक्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाया, तो यह स्थिति वेनेजुएला से भी ज्यादा विनाशकारी होगी।
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उन्होंने खुलासा किया कि नए साल से ठीक पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के संकेतों से यह साफ हुआ कि ईरान अगला निशाना हो सकता है।
इजरायल के दबाव में काम करता है अमेरिका
जेफ्री सैक्स के अनुसार, इजरायल ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रवैया रखता है और वहां की सरकार को गिराने की मंशा रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका कई बार इजरायल के दबाव में वही युद्ध लड़ता है, जो इजरायल चाहता है।
सैक्स ने इसे वैश्विक शांति के लिए एक बेहद खतरनाक स्थिति बताया।
मानवाधिकारों के नाम पर युद्ध की तैयारी?
ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए जेफ्री सैक्स ने कहा कि यह डीप स्टेट की पुरानी रणनीति है, जिसमें मानवाधिकारों का हवाला देकर किसी देश पर हमला करने की जमीन तैयार की जाती है।
उन्होंने आगाह किया कि ईरान के साथ युद्ध सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक युद्ध की वजह भी बन सकता है।



