Saturday, February 21, 2026

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1978 दंगे के ‘राज़’ पर फिर शुरू हुई चर्चाएं,संभल के चर्चित कुएं की खुदाई पर बढ़ी हलचल

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के संभल में उस चर्चित कुएं की खुदाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वर्ष 1978 में हुए दंगे के कई ‘राज़’ इसमें दफन हो सकते हैं। शुक्रवार तड़के उस पेड़ को काट दिया गया, जो खुदाई कार्य में रुकावट बन रहा था। पेड़ हटते ही कुएं के फिर से खोले जाने और पुराने दंगे की यादों को लेकर शहर में तरह-तरह की बातें फैलने लगी हैं।

हालाँकि सिटी मजिस्ट्रेट ने साफ किया है कि यह खुदाई दंगों से जुड़े किसी नए खुलासे के उद्देश्य से नहीं की जा रही। उनके मुताबिक नगर पालिका द्वारा प्राचीन कुओं, कूपों और तीर्थ स्थलों को पारंपरिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करने के अभियान के तहत ही यह कार्य कराया जा रहा है।

पुराने पेड़ ने रोकी थी खुदाई, वन विभाग ने सुबह-सुबह हटाया

संभल कोतवाली क्षेत्र स्थित एकता पुलिस चौकी के पास मौजूद यह कई दशक पुराना कुआं बुधवार को शुरू हुई खुदाई के बाद चर्चा में आया था। श्रमिकों द्वारा फावड़े से की जा रही मैन्युअल खुदाई में पास का एक विशाल पेड़ लगातार बाधा बन रहा था।
शुक्रवार की भोर में वन विभाग की टीम ने पेड़ को काटकर मार्ग साफ कर दिया, जिसके बाद कुएं की खुदाई दोबारा शुरू किए जाने की संभावना है।

नगर पालिका द्वारा नवंबर महीने से चल रहे सफाई और पुनर्संरक्षण अभियान में इस कुएं को भी शामिल किया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कुआं वर्ष 1978 के दंगे के दौरान खूब सुर्खियों में रहा था, इसलिए इसकी खुदाई शुरू होते ही शहर में पुराने किस्से एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं।

क्या हुआ था संभल में 47 साल पहले?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1978 में संभल में बड़ा दंगा हुआ था, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। चर्चा है कि उसी दौरान व्यापारी रामशरण रस्तोगी की हत्या कर दी गई थी, और आरोप है कि उनका शव व दुकान का सामान इसी कुएं में फेंका गया था।
इसी वजह से जब दशकों बाद इस कुएं की सफाई और खुदाई शुरू हुई, तो शहर में एक बार फिर पुराने दंगे से जुड़े संभावित ‘राज़’ उजागर होने की बातों ने जोर पकड़ लिया।

शुक्रवार सुबह पेड़ हटाए जाने के बाद स्थानीय लोगों में उत्सुकता और बढ़ गई है, जबकि प्रशासन यह दोहराता रहा है कि यह कार्य केवल ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण अभियान का हिस्सा है।

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