न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। वायदा बाजार में कीमत 504 रुपये चढ़कर 6,596 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों की खबरों ने आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है।
भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत अपने कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। इसमें से करीब आधा तेल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। खासतौर पर इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से बड़ी मात्रा में तेल और एलपीजी की आपूर्ति होती है। ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकती है।
रूस से आयात बढ़ाने की तैयारी
सरकार ने हालात की समीक्षा शुरू कर दी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का आकलन किया। सूत्रों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया जा सकता है ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो।
भारत के पास लगभग 74 दिनों का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार मौजूद है। इससे शुरुआती झटकों को संभाला जा सकता है, लेकिन यदि तनाव लंबा खिंचता है तो भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
गैस आपूर्ति पर भी नजर
फरवरी 2026 में भारत ने 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात किया, जिसमें से 1.66 मिलियन टन खाड़ी देशों से आया। ऐसे में गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भी वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर विचार किया जा रहा है।
ईरान और ओपेक प्लस फैक्टर
ईरान प्रतिदिन करीब 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। यदि यह आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
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इस बीच, ओपेक प्लस ने अप्रैल से उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरे तो इसका असर सीमित रह सकता है।
40 देशों से तेल खरीद रहा भारत
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत अब करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। 2022 से पहले यह संख्या 27 थी। आयात स्रोतों में विविधता लाकर भारत संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर चुका है।
कुल मिलाकर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति और रणनीतिक भंडार के जरिए शुरुआती जोखिमों को कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं।



