सर्वोदय/देश-विदेश:- म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 1644 तक पहुंच गया है। वहीं, 3400 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। म्यांमार में लगातार छह भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और यह सिलसिला अब भी जारी है। कल से आज तक म्यांमार में 16 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव के कारण म्यांमार भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है और यहां भूकंप आने का खतरा हमेशा बना रहता है।
भूकंप के प्रभाव: म्यांमार में भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि यह कई इलाकों में भारी तबाही का कारण बन गई। सागाइंग फॉल्ट, जो म्यांमार के कई प्रमुख शहरों जैसे यांगून, मांडले, और बागो से होकर गुजरता है, ने इस आपदा के खतरे को और बढ़ा दिया है।
भारत का समर्थन: भारत ने संकट के इस समय में म्यांमार के साथ अपनी एकजुटता दिखाई है। ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत भारत ने म्यांमार को राहत और बचाव कार्यों के लिए 15 टन सामग्री, 80 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम और एक फील्ड अस्पताल भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के वरिष्ठ जनरल से फोन पर बात कर उन्हें इस विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “भारत इस कठिन समय में म्यांमार के साथ खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।”
भविष्य की स्थिति: म्यांमार में भूकंप के कारण हर साल कई बार भूकंपीय घटनाएं होती रहती हैं, जिससे यहां के लोग हमेशा भूकंप के खतरे से जूझते रहते हैं। 1990 से 2019 के बीच म्यांमार और उसके आस-पास के क्षेत्रों में 3.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले लगभग 140 भूकंप आए हैं। भूकंप के बाद म्यांमार में राहत कार्यों की रफ्तार तेज़ कर दी गई है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस संकट की घड़ी में म्यांमार के साथ है।



