न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि भगवान से मनचाहा वरदान कैसे मिले और ऐसी कौन-सी तपस्या या साधना की जाए, जिससे ईश्वर स्वयं प्रकट होकर वरदान दें। इसी जिज्ञासा के साथ एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से यह प्रश्न किया, जिस पर महाराज जी ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
तपस्या को लेकर प्रेमानंद महाराज का मार्गदर्शन
प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि भगवान ने अर्थार्थी भक्तों को भी सच्चा भक्त माना है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति भगवान से कुछ प्राप्त करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने जीवन में कुछ मूलभूत नियमों को अपनाना होगा।
महाराज जी के अनुसार—ब्रह्मचर्य का पालन करें, पवित्र और सात्विक आहार लें वह भी अल्प मात्रा में, केवल उतना ही भोजन करें जिससे शरीर का पालन हो सके इसके अलावा निरंतर भगवान का नाम जप करें |
उन्होंने कहा कि इन नियमों का ईमानदारी से पालन करने पर साधक को इच्छित फल की प्राप्ति हो सकती है।
क्या नहीं करना चाहिए?
प्रेमानंद महाराज जी ने चेतावनी देते हुए कहा कि—किसी की निंदा न करें और न ही निंदा सुनें |भगवान का साक्षात्कार कोई खेल नहीं है | ब्रह्मचर्य में किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं आना चाहिए |महाराज जी ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका सही उपयोग निरंतर नाम जप में करना चाहिए।
कितने दिन में भगवान प्रकट होंगे?
जब भक्त ने पूछा कि भगवान के प्रकट होने में कितना समय लगेगा, तो महाराज जी ने कहा— “जब तक भगवान प्रकट न हों, तब तक साधना करते रहो।”
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उन्होंने समझाया कि सबसे पहले मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं, हृदय शुद्ध होता है। यह प्रक्रिया कई जन्मों के संस्कारों को समाप्त करती है। जब पाप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, तब भगवान का प्रकाश प्रकट होता है। महाराज जी ने कहा कि मुनि-ऋषि भी जन्म-जन्म तक उसी परम तत्व की प्राप्ति के लिए तपस्या करते हैं।
अगर इच्छा ही समाप्त हो जाए तो?
इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि यदि व्यक्ति इच्छा लेकर भजन करता है, तो भगवान उसकी इच्छा पूरी करते हैं, चाहे बाद में वह इच्छा स्वयं ही क्यों न समाप्त हो जाए।
भक्त ने मांगा चक्रवर्ती राजा बनने का वरदान
जब महाराज जी ने भक्त से पूछा कि वह क्या वरदान चाहता है, तो भक्त ने कहा—चक्रवर्ती राजा बनना चाहता हूं। इस पर महाराज जी ने कहा कि कलियुग में चक्रवर्ती राजा की अवधारणा नहीं रह गई है।
उन्होंने समझाया कि यदि कोई भगवान को ही प्राप्त कर ले, तो पूरा ब्रह्मांड उसका हो जाता है। चक्रवर्ती राजा होना बहुत छोटा लक्ष्य है। इसके बजाय भगवान का दासत्व मांगना चाहिए—कि जीवन भर उनके चरणों के समीप रहने का सौभाग्य मिले।
Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और प्रवचनों पर आधारित हैं। हम इनके पूर्णत: सत्य या वैज्ञानिक होने का दावा नहीं करते। अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या गुरु से परामर्श करें।



