न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के बदायूं स्थित जिला महिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं ने एक बार फिर स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंबुलेंस न मिलने और अस्पताल की लिफ्ट खराब होने के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल के गेट पर ही प्रसव कराना पड़ा। इलाज में हुई देरी के चलते नवजात की मौत हो गई।
घटना सोमवार देर रात की है। उझानी ब्लॉक क्षेत्र के सिरसौली गांव निवासी सूरज की पत्नी सविता को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 102 एंबुलेंस सेवा के लिए लगातार फोन किया, लेकिन काफी देर तक कोई मदद नहीं मिल सकी। महिला की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे ई-रिक्शा से करीब 12 किलोमीटर दूर जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचने पर भी हालात नहीं सुधरे। गेट पर न तो कोई वार्ड बॉय मौजूद था और न ही सुरक्षा गार्ड। परिजन खुद ही गर्भवती को ई-रिक्शा से उतारकर लेबर रूम की ओर ले जाने लगे, लेकिन तभी महिला की तबीयत और बिगड़ गई और पंजीकरण कक्ष के पास ही उसका प्रसव हो गया।
परिजनों का आरोप है कि इस दौरान प्रसूता दर्द से चीखती रही, लेकिन डॉक्टर और कर्मचारी लापरवाह बने रहे। काफी देर बाद जब परिजनों ने हंगामा किया, तब जाकर स्टाफ को बुलाया गया। इसके बाद मां और नवजात बच्ची को वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी।
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नवजात की मौत से नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रेचर, व्हीलचेयर या मेडिकल स्टाफ की मदद मिल जाती तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी।
इस मामले में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. शोभा अग्रवाल ने बताया कि प्रसूता को भर्ती कर लिया गया है। उनका कहना है कि महिला अस्पताल पहुंचने में देर से आई, इसी कारण गेट पर डिलीवरी हुई। फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
यह पहली बार नहीं है जब जिला महिला अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे हों। करीब दो साल पहले भी अस्पताल के मुख्य गेट पर प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया था। उस समय जांच में डॉक्टर और कर्मचारी दोषी पाए गए थे और कार्रवाई के तहत कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। बावजूद इसके, अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है।



