अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़:- रामलला की पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और अध्यात्म के अनुपम संगम की साक्षी बनी। महाराष्ट्र के नागपुर से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक गोपाल दाधीच महाराज के सानिध्य में वैदेही भवन में आयोजित भव्य श्रीराम कथा का श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ समापन हुआ।
कथा के अंतिम दिन श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए और वैदेही भवन परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।
रामायण और भागवत का सरल संदेश
श्रीराम कथा के दौरान गोपाल दाधीच महाराज ने रामायण और श्रीमद्भागवत जैसे सनातन ग्रंथों की महत्ता को अत्यंत सरल, ओजस्वी और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर नहीं होना चाहिए।
महाराज श्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सनातन ग्रंथों का अध्ययन कर जीवन में नैतिकता, मर्यादा और सेवा भाव को अपनाएं।
श्रीराम का जीवन है आदर्शों की पाठशाला
प्रभु श्रीराम के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कथावाचक ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन हर युग और हर वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है। एक आदर्श पुत्र, कर्तव्यनिष्ठ पति, न्यायप्रिय राजा और समाज के संरक्षक के रूप में उन्होंने जीवन के प्रत्येक दायित्व का निर्वहन किया।
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उन्होंने कहा कि कथा श्रवण की सार्थकता तभी है, जब हम श्रीराम के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में उतारें।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें अयोध्या के साथ-साथ नागपुर समेत देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्ति-भजनों और ओजस्वी प्रवचनों के बीच श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए।
आयोजन को लेकर दिखा विशेष उत्साह
कार्यक्रम के संयोजक सतनारायण लोहिया ने बताया कि रामनगरी अयोध्या में गुरुजी के सानिध्य में श्रीराम कथा का आयोजन होना सभी भक्तों के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वहीं नागपुर से आए श्रद्धालु रमो अग्रवाल ने कहा कि अयोध्या का दिव्य और भव्य स्वरूप मन को अभिभूत करने वाला है। सुदृढ़ सड़कें, आध्यात्मिक वातावरण और प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर उनका जीवन धन्य हो गया।



